दस्तावेजों की होगी गहन जांच
विभाग के सचिव जय सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि गैरमजरूआ आम-खास, खासमहाल, सरकार में निहित बकाश्त, भू-हदबंदी की अतिरिक्त भूमि, कैसर-ए-हिन्द, सैरात समेत अन्य सरकारी जमीन पर यदि किसी व्यक्ति के नाम जमाबंदी दर्ज है तो उसके आधार की जांच की जाए।
जांच के दौरान खतियान, सरकारी भूमि पंजी, बंदोबस्ती या पट्टा आदेश, अर्जन से जुड़े रिकॉर्ड और पुराने राजस्व व न्यायालयीय आदेशों को देखा जाएगा। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित जमीन पर जमाबंदी किस आधार पर दर्ज हुई।
सुनवाई के बाद ही होगी जमाबंदी रद्द
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ जमीन की श्रेणी या बकाश्त की प्रविष्टि देखकर किसी जमाबंदी को अपने आप अवैध नहीं माना जाएगा। यदि किसी व्यक्ति के पास वैध बंदोबस्ती, पट्टा या अन्य कानूनी अधिकार का दावा है तो उसकी भी जांच होगी।
जांच में जमाबंदी नियमों के विपरीत पाए जाने पर अंचल अधिकारी साक्ष्यों के साथ प्रस्ताव अपर समाहर्ता को भेजेंगे। संबंधित पक्ष को अपना पक्ष और दस्तावेज रखने का अवसर देने के बाद ही जमाबंदी रद्द करने की कार्रवाई होगी।
आपको बता दें की विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी जमाबंदियों को सामान्य ऑनलाइन सुधार प्रक्रिया से सीधे हटाया नहीं जाएगा। सक्षम प्राधिकारी के आदेश और लागू न्यायालयीय निर्देशों के अनुसार ही रिकॉर्ड में बदलाव किया जाएगा।
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