खबर के अनुसार पटना के महावीर कैंसर संस्थान और अनुसंधान केंद्र के रिसर्च में ये पाया गया हैं की पानी में आर्सेनिक हाेना गॉल ब्लाडर कैंसर का कारण हो सकता हैं। इसका असर बिहार के 20 जिलों में सबसे ज्यादा देखने को मिल सकता हैं।
बता दें की 14 मार्च को लंदन के नेचर जर्नल-साइंटिफिक रिपोर्ट्स में ये रिसर्च पब्लिस हुआ था। जिसमे कहा गया है की आर्सेनिक लाेगाें के शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के साथ जुड़ जाता है और कई यौगिकों के साथ मिलकर पित्ताशय की थैली में पथरी बनाता है। अगर इसका लंबे समय तक इलाज नहीं हुआ तो यह कैंसर रोग में तब्दील हाे जाता हैं।
इन जिलों के लोग पित्ताशय की थैली की बीमारी से सबसे प्रभावित।
पटना, बक्सर, भोजपुर, सारण, वैशाली, सारण, समस्तीपुर, गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, कटिहार, मुंगेर और भागलपुर।

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