दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मद्य निषेध कानून में दी गई जमानत के खिलाफ दायर अनेक याचिकाओं को खारिज कर दिया। साथ ही साथ जमानत याचिकाओं के खिलाफ सुनवाई करते हुए कहा कि बिहार के इस कानून ने अदालतों का बोझ बढ़ा दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के कहा की पटना हाईकोर्ट में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसी याचिकाएं आती हैं। इसकी सुनवाई में लंबा समय लगता हैं। प्रतिदिन 10 से 15 जज ऐसी याचिकाएं सुन रहे हैं। बता दें की बिहार में अगर कोई व्यक्ति शराब के साथ पकड़ा गया तो उसे 10 साल की सजा हैं।
बता दें की सुप्रीम कोर्ट से कई याचिकाओं ने जमानत की गुहार लगाई थी। जिसपर बिहार सरकार के वकील मनीष कुमार ने कहा कि इनकी जमानत रद्द किया जाना चाहिए। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए क्योंकि आपने आबकारी कानून बना दिया है।
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