केंद्र सरकार का बड़ा प्लान! LPG-CNG के लिए नई खुशखबरी

नई दिल्ली। आने वाले समय में भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। सरकार देश में ईंधन की आपूर्ति को किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट से सुरक्षित रखने के लिए एक नए रणनीतिक भंडार की योजना पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव में केवल कच्चे तेल को ही नहीं, बल्कि LPG और LNG जैसी गैसों को भी रणनीतिक रिजर्व का हिस्सा बनाने की तैयारी है।

अगर यह योजना मंजूर होती है, तो भारत के पास वैश्विक स्तर पर आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में घरेलू जरूरतों को कुछ समय तक पूरा करने के लिए अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध रहेगा। हालांकि, अभी यह योजना शुरुआती स्तर पर है और इसे लागू करने से पहले सरकार की अंतिम मंजूरी जरूरी होगी।

क्यों पड़ी गैस का रणनीतिक भंडार बनाने की जरूरत?

भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के एक बड़े हिस्से के लिए दूसरे देशों से होने वाले आयात पर निर्भर है। ऐसे में दुनिया के किसी हिस्से में युद्ध, समुद्री मार्गों में बाधा या भू-राजनीतिक तनाव पैदा होने पर ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी को देखते हुए सरकार अब पारंपरिक तेल भंडारण व्यवस्था से आगे बढ़कर गैस के लिए भी सुरक्षा कवच तैयार करने पर विचार कर रही है।

LPG और प्राकृतिक गैस पर लग सकता है छोटा शुल्क

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकार उपभोक्ताओं से मामूली शुल्क लेकर रणनीतिक ईंधन रिजर्व तैयार करने पर विचार कर रही है। रिपोर्टों में बताया गया है कि LPG पर करीब 1.29 रुपये प्रति किलोग्राम और प्राकृतिक गैस पर लगभग 1.43 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर शुल्क लगाने का प्रस्ताव विचाराधीन है।

CNG और उद्योगों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव

प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल केवल घरों में PNG के तौर पर नहीं होता। बिजली उत्पादन, उर्वरक, उद्योग और परिवहन क्षेत्र में CNG की भी बड़ी भूमिका है। इसलिए गैस का रणनीतिक भंडार बनने से केवल घरेलू LPG उपभोक्ताओं को ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को आपूर्ति सुरक्षा मिल सकती है।

हालांकि, प्रस्तावित शुल्क लागू होने की स्थिति में गैस पर निर्भर कारोबारों की लागत में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है। कंपनियां इस अतिरिक्त लागत का कितना हिस्सा खुद वहन करेंगी और कितना उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा, यह बाजार और सरकारी नीति पर निर्भर करेगा।

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