LPG ग्राहकों के लिए खुशखबरी, केंद्र सरकार ने दी अहम जानकारी

नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की सप्लाई को लेकर केंद्र सरकार ने अहम जानकारी साझा की है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में लगातार हो रहे बदलावों के बीच भारत ने LPG की आपूर्ति के लिए अपने स्रोतों में बदलाव किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक, इस समय अमेरिका भारत को LPG उपलब्ध कराने वाला सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता देश बन गया है।

मंत्री के बयान के अनुसार, कुछ समय पहले तक भारत की LPG जरूरतों में अमेरिका की हिस्सेदारी काफी सीमित थी। बाद में ऊर्जा आयात के स्रोतों को व्यापक बनाने की रणनीति के तहत अमेरिका से खरीद बढ़ाने की योजना बनाई गई। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में बदलाव के साथ अमेरिकी LPG की हिस्सेदारी और बढ़ गई।

पहले अमेरिका से कम होती थी LPG की खरीद

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर रहा है। LPG के मामले में भी अलग-अलग देशों से आपूर्ति की जाती रही है। सरकार की नीति रही है कि किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न हो और ऊर्जा के कई स्रोत बनाए जाएं। इसी रणनीति के तहत अमेरिका से LPG आयात बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया गया। केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, शुरुआत में इस फैसले को लेकर कई सवाल भी उठाए गए थे।

बदला ऊर्जा आयात का समीकरण

केंद्रीय मंत्री के अनुसार, साल की शुरुआत में अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया था। उस समय क्षेत्रीय तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मौजूदा स्तर का संकट नहीं था। इसके बाद फरवरी में युद्ध की स्थिति पैदा हुई और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति पर इसका असर देखने को मिला। ऐसे समय में अमेरिका से बढ़ी LPG आपूर्ति भारत के लिए एक वैकल्पिक स्रोत के तौर पर महत्वपूर्ण साबित हुई।

कई देशों से ऊर्जा खरीद रहा भारत

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा खरीद को एक ही देश तक सीमित रखने के बजाय कई स्रोतों में बांटने की कोशिश की है। खाड़ी क्षेत्र के देशों के अलावा रूस से भी भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन और गैस की आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना है।

ऊर्जा भंडार भी मजबूत रखने पर जोर

भारत दुनिया के प्रमुख ऊर्जा आयातक देशों में शामिल है। ऐसे में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान पर्याप्त भंडार होना बेहद जरूरी माना जाता है। रिपोर्टों के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में भारत के पास करीब 75 दिनों के आसपास का पेट्रोलियम भंडार उपलब्ध है। यह भंडार वैश्विक सप्लाई में अचानक आने वाली बाधा के दौरान देश को कुछ समय तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।

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