केंद्र सरकार का बड़ा फैसला! HRA पर सरकार ने किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार ने बताया है कि यदि पति और पत्नी दोनों केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और दोनों की तैनाती एक ही स्टेशन पर है, तो दोनों को अलग-अलग HRA का लाभ नहीं मिलेगा। यदि दोनों में से किसी एक को सरकारी आवास आवंटित कर दिया जाता है, तो दूसरे कर्मचारी का HRA का दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।

किन कर्मचारियों को मिलता है HRA?

हाउस रेंट अलाउंस (HRA) उन केंद्रीय कर्मचारियों को दिया जाता है जिन्हें सरकार की ओर से आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है। इस भत्ते का उद्देश्य किराए के मकान में रहने वाले कर्मचारियों के आवास संबंधी खर्च में आर्थिक सहायता देना है। यदि कोई कर्मचारी सरकारी आवास के बजाय किराए के घर में रह रहा है और वह निर्धारित शर्तों को पूरा करता है, तो उसे HRA का लाभ मिलता है। हालांकि, पति-पत्नी दोनों के सरकारी कर्मचारी होने की स्थिति में अलग नियम लागू होते हैं।

दोनों सरकारी कर्मचारी हों तो क्या नियम?

सरकार के अनुसार यदि पति और पत्नी दोनों केंद्र सरकार की सेवा में हैं और उनकी पोस्टिंग एक ही शहर या स्टेशन पर है, तो उन्हें एक परिवार माना जाता है। ऐसी स्थिति में यदि किसी एक कर्मचारी को सरकारी आवास आवंटित हो जाता है, तो यह माना जाएगा कि पूरे परिवार को सरकारी आवास की सुविधा मिल गई है। इसलिए दूसरे कर्मचारी को उसी स्टेशन पर अलग से HRA देने का प्रावधान नहीं है।

राज्यसभा में सरकार ने क्या जानकारी दी?

राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया कि एक ही स्टेशन पर कार्यरत पति-पत्नी में से किसी एक को सरकारी आवास मिलने के बाद दूसरे कर्मचारी के HRA का दावा मान्य नहीं होगा। सरकार का कहना है कि जब परिवार के लिए सरकारी आवास उपलब्ध है, तब अलग से किराए के मकान का खर्च स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसलिए दूसरे कर्मचारी को HRA देने का आधार नहीं बनता।

क्या HRA नियम में होगा कोई बदलाव?

सरकार ने फिलहाल HRA से जुड़े इस नियम में किसी भी प्रकार का संशोधन करने की योजना से इनकार किया है। राज्यसभा में यह भी पूछा गया था कि क्या इस संबंध में सरकार को कोई सुझाव या प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ है। सरकार ने जवाब में बताया कि इस विषय पर न तो कोई औपचारिक प्रस्ताव विचाराधीन है और न ही नियमों की समीक्षा की कोई प्रक्रिया शुरू की गई है। यानी वर्तमान व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी।

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