बाल शिक्षा भत्ता हुआ अधिक
नए आदेश के अनुसार, बाल शिक्षा भत्ता अब 2,250 रुपये से बढ़ाकर 2,812.50 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। यानी प्रत्येक पात्र बच्चे पर कर्मचारियों को हर महीने 562.50 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। सालभर में यह बढ़ोतरी 6,750 रुपये तक पहुंच जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस भत्ते के भुगतान के लिए हर बार विस्तृत खर्च का बिल प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा। निर्धारित नियमों के तहत तय दर के अनुसार भुगतान किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों के लिए दावा प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान होगी।
हॉस्टल सब्सिडी में भी बढ़ा लाभ
घर से दूर रहकर पढ़ाई करने वाले बच्चों के लिए मिलने वाली हॉस्टल सब्सिडी में भी 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब यह राशि 6,750 रुपये से बढ़ाकर 8,437.50 रुपये प्रति माह कर दी गई है। हालांकि भुगतान वास्तविक खर्च या निर्धारित सीमा, जो भी कम होगी, उसके आधार पर किया जाएगा।
इस संशोधन के बाद कर्मचारियों को हॉस्टल सब्सिडी के तहत 1,687.50 रुपये प्रति माह का अतिरिक्त लाभ मिलेगा। वार्षिक आधार पर यह बढ़ोतरी 20,250 रुपये तक पहुंच सकती है।
दोनों सुविधाओं का संयुक्त लाभ
यदि कोई कर्मचारी अपने बच्चे के लिए बाल शिक्षा भत्ता और हॉस्टल सब्सिडी दोनों का दावा करने का पात्र है, तो उसे कुल मिलाकर 2,250 रुपये प्रति माह का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। यह राशि एक वर्ष में 27,000 रुपये तक पहुंच सकती है, जिससे बच्चों की शिक्षा पर होने वाले खर्च का बोझ काफी हद तक कम होगा।
दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष प्रावधान
दिव्यांग बच्चों के मामले में सरकार ने पहले से लागू विशेष व्यवस्था को बरकरार रखा है। ऐसे बच्चों के लिए बाल शिक्षा भत्ता सामान्य दर का दोगुना मिलता है। नई दरें लागू होने के बाद इस श्रेणी के कर्मचारियों को 4,500 रुपये प्रति माह तक अतिरिक्त लाभ मिल सकता है, जिससे विशेष जरूरतों वाले बच्चों की शिक्षा में आर्थिक सहायता और मजबूत होगी।
सभी कार्यालयों में लागू होंगे नए नियम
रेलवे प्रशासन के अनुसार संशोधित दरें एनसीआर सहित सभी रेलवे जोन, उत्पादन इकाइयों, प्रशिक्षण संस्थानों और क्षेत्रीय कार्यालयों में लागू कर दी गई हैं। इससे अलग-अलग स्थानों पर भत्तों के भुगतान में आ रही असमानताओं को दूर किया जा सकेगा और पात्र कर्मचारियों को संशोधित लाभ समय पर मिल सकेगा।
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