यूपी के स्कूलों में बड़ा बदलाव! सरकार ने लागू की नई व्यवस्था

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए इस शैक्षिक सत्र से पढ़ाई का तरीका पहले से अधिक गतिविधि आधारित होने जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप अब विद्यार्थियों को सिर्फ पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें अपने आसपास की दुनिया, तकनीक, स्थानीय कला और रोजगार से जुड़ी चीजों का व्यावहारिक अनुभव भी कराया जाएगा।

इसके लिए प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों, कंपोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 10 बैगलेस डे आयोजित किए जाएंगे। इन दिनों बच्चों को स्कूल बैग और नियमित कक्षा के बोझ से अलग हटकर अलग-अलग गतिविधियों के जरिए सीखने का अवसर मिलेगा।

अगस्त से नवंबर तक शनिवार का दिन होगा खास

इस पहल के तहत अगस्त से नवंबर 2026 तक प्रत्येक शनिवार विद्यार्थियों के लिए गतिविधि आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं। यानी इन दिनों बच्चों को केवल किताब खोलकर पढ़ने के बजाय किसी गतिविधि को करके, देखकर और समझकर सीखने का मौका मिलेगा। इसके अलावा 14 नवंबर को सभी संबंधित विद्यालयों में बाल मेला आयोजित किया जाएगा।

हर स्कूल को मिलेंगे 6,500 रुपये

बैगलेस डे और उससे जुड़ी गतिविधियों के संचालन के लिए सरकार ने विद्यालयों को आर्थिक सहायता भी दी है। प्रत्येक विद्यालय को 6,500 रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। पूरे प्रदेश में इस कार्यक्रम के लिए सरकार ने करीब 28.94 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। इसका इस्तेमाल गतिविधियों के आयोजन और जरूरी संसाधनों की व्यवस्था में किया जाएगा।

बच्चों के लिए 'आनंदम' मॉड्यूल

कार्यक्रम को व्यवस्थित तरीके से लागू करने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी SCERT ने 'आनंदम' नाम से एक विशेष मॉड्यूल तैयार किया है। इसमें कुल 34 अलग-अलग गतिविधियां शामिल की गई हैं। इन गतिविधियों को मुख्य रूप से तीन हिस्सों में रखा गया है। विज्ञान, पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी; सार्वजनिक कार्यालय, स्थानीय उद्योग एवं कला; तथा संस्कृति एवं इतिहास।

AI और रोबोटिक्स भी होंगे गतिविधियों का हिस्सा

नई शिक्षा व्यवस्था का एक अहम हिस्सा आधुनिक तकनीक भी है। बैगलेस डे की गतिविधियों में बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स, स्क्रैच कोडिंग और ड्रोन तकनीक जैसी चीजों से परिचित कराने की योजना है। इसके अलावा फोटोग्राफी, संगीत, नाटक और डूडलिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियां भी बच्चों की प्रतिभा को निखारने में मदद करेंगी।

मिट्टी के खिलौने से लेकर ड्रोन तक सीखेंगे विद्यार्थी

बैगलेस डे के दौरान बच्चों को कई तरह की गतिविधियों में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा। उदाहरण के तौर पर विद्यार्थी मिट्टी से खिलौने बनाना, किचन गार्डन तैयार करना, जैविक खेती और जल संरक्षण जैसी गतिविधियों को समझेंगे। बच्चों को स्वास्थ्य, चाइल्ड सेफ्टी, जूट क्राफ्ट और विज्ञान मॉडल बनाने जैसी गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही उन्हें बैंक और डाकघर जैसी सार्वजनिक सेवाओं की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिल सकता है।

स्थानीय कारोबार और 'वोकल फॉर लोकल' से जुड़ेंगे बच्चे

नई व्यवस्था में बच्चों को स्थानीय स्तर पर मौजूद कला, शिल्प और उद्योगों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। एक जिला-एक उत्पाद (ODOP), आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल जैसी अवधारणाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराया जाएगा। स्थानीय उद्योगों और सार्वजनिक संस्थानों के भ्रमण के जरिए बच्चों को यह समझाने की कोशिश होगी कि उनके आसपास किस तरह के व्यवसाय और रोजगार के अवसर मौजूद हैं।

0 comments:

Post a Comment