खबर के अनुसार बिहार कैबिनेट ने बालू खनन नीति 2019 में संशोधन के तहत बालू घाटों की बंदोबस्ती अब जिलाधिकार के स्तर करने की मंजूरी दी हैं। वहीं बंदोबस्त लेने वाले ठेकेदारों को पर्यावर्णीय स्वीकृति लेना भी अनिवार्य किया गया हैं।
बता दें की बिहार के सभी जिलों में जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर चिह्नित बालू घाटों की पांच सालों के लिए बंदोबस्ती की स्वीकृति दी गयी हैं। वहीं सरकार ने राज्य की नयी बालू खनन नीति की स्वीकृति के बाद बालू घाटों की बंदोबस्ती के शुल्क में 50% की वृद्धि की हैं।
मिली जानकारी के अनुसार बिहार में फिलहाल बालू खनन को सितंबर महीने तक के लिए बंद किया गया हैं। लेकिन इस अवधि के बीच में बालू घाटों की बंदोबस्ती पांच सालों के लिए जिलाधिकारी द्वारा ई नीलामी सह टेंडर के माध्यम से किया जायेगा।

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