बता दें की मोनोसोडियम ग्लूटामेट(एमएसजी) और अधिक सीसे की वजह से मैगी बच्चों में कई तरह की समस्या उत्पन कर सकती हैं। डॉक्टर बताते हैं की अगर 6 साल से कम उम्र के बच्चों के शरीर में लेड पहुंच जाए तो ये बच्चे का आईक्यू लेवल प्रभावित कर सकता हैं।
खबर के अनुसार मैगी में पाए जानें वाला लेड, मोनोसोडियम ग्लूटामेट(एमएसजी) से अधिक खतरनाक होता हैं। यह बच्चों के साथ साथ बड़ों के सेहत पर भी बुरा असर डालता हैं। भारत में कई बार मैगी को लेड अधिक होने के कारण बैन भी किया गया हैं।
मैगी खानें से होने वाले नुकसान।
1 .किडनी खराब हो सकती है और नर्वस सिस्टम डैमेज हो सकता है।
2 .अगर बॉडी में अधिक मात्रा में लेड शामिल हो जाए तो इसकी वजह से न्यूरोलॉजिकल परेशानी हो सकती है।
3 .ज्यादा मैगी के सेवन से बच्चों में सीखने की क्षमता पर असर पड़ता है।
4 .मैगी के ज्यादा सेवन से किडनी को भी नुकसान पहुंचता है
5 .बता दें की इसके सेवन से लीवर पर खतरा बढ़ जाता है।

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