यूपी में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए नई गाइडलाइन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेशभर के सभी नगर निकायों में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए नई गाइडलाइन लागू की है, जो कि प्रदेशवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इस नई व्यवस्था के तहत अब प्राइवेट अस्पतालों के जरिए भी जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनाए जा सकेंगे, जिससे लोगों को यह प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए सरकारी कार्यालयों में बार-बार जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

नई व्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ

1 .प्राइवेट अस्पताल शामिल: अब तक केवल सरकारी अस्पतालों से ही जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होते थे, लेकिन अब प्राइवेट अस्पतालों को भी यह सुविधा दी गई है। इसका फायदा यह होगा कि मरीज और उनके परिजनों को प्रमाणपत्र के लिए सरकारी दफ्तरों में भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।

2 .जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र ऑनलाइन: इस नई गाइडलाइन के तहत अब नगर निगम द्वारा जारी किए गए पुराने और हाथ से लिखे गए प्रमाणपत्रों को भी नया किया जा सकेगा, लेकिन इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। ऑनलाइन प्रक्रिया से लोगों को राहत मिलेगी, क्योंकि इससे लंबी कतारों और समय की बचत होगी।

3 .प्राइवेट अस्पतालों पर कड़ी निगरानी: शासन ने प्राइवेट अस्पतालों को 31 मार्च तक नई व्यवस्था को लागू करने का समय दिया है। इन अस्पतालों को इसके लिए विशेष कर्मचारियों की नियुक्ति करनी होगी और सारे रिकॉर्ड ऑनलाइन जमा करने होंगे। यदि किसी अस्पताल से फर्जी प्रमाणपत्र जारी होता है, तो उनके खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जाएगी। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बचा जा सके और प्रमाणपत्रों की गुणवत्ता बनी रहे।

4 .प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया: इस नई व्यवस्था में, प्राइवेट अस्पतालों में आवेदन और सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रमाणपत्र नगर निगम के जोनल अफसर द्वारा जारी किए जाएंगे। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और प्रमाणपत्र सटीक रूप से प्रदान किए जाएं।

5 .एसडीएम के आदेश की आवश्यकता नहीं: पहले जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए एसडीएम से आदेश प्राप्त करना आवश्यक होता था, लेकिन अब इस प्रक्रिया को सरल कर दिया गया है। अब बिना किसी मध्यस्थता के नगर निगम में ऑनलाइन आवेदन करके प्रमाणपत्र प्राप्त किया जा सकता है।

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