बिहार में बनेगा 4-लेन हाईवे सड़क, इन जिलों के लिए खुशखबरी!

न्यूज डेस्क। उत्तर बिहार की सड़क व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। साहेबगंज–अरेराज–बेतिया (NH-139W) मार्ग को लगभग 3,822 करोड़ रुपये की लागत से चार लेन ग्रीनफील्ड हाईवे के रूप में विकसित किया जाएगा। 

यह परियोजना हाइब्रिड एन्‍युइटी मोड (HAM) के तहत स्वीकृत की गई है और पटना से बेतिया तक प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है। यह नया मार्ग मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज क्षेत्र से शुरू होकर पूर्वी चंपारण के अरेराज होते हुए पश्चिम चंपारण के बेतिया तक पहुंचेगा।

पूरी तरह नया ग्रीनफील्ड रूट

इस परियोजना की खास बात यह है कि यह ग्रीनफील्ड श्रेणी में आती है। यानी मौजूदा सड़क को चौड़ा करने के बजाय बिल्कुल नए रास्ते से हाईवे बनाया जाएगा। खेतों और खुले क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली यह सड़क आधुनिक डिजाइन, कम मोड़ और बेहतर सुरक्षा मानकों के साथ तैयार की जाएगी। इस पैकेज में अरेराज के पास गंडक नदी पर एक बड़े पुल का निर्माण भी शामिल है, जिससे परियोजना की लागत अधिक रखी गई है। पूरे पटना-बेतिया कॉरिडोर पर कुल अनुमानित खर्च 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया जा रहा है।

समय और दूरी में बड़ी कमी

फिलहाल पटना से बेतिया तक की यात्रा में लगभग 6 से 7 घंटे लग जाते हैं। नए फोरलेन हाईवे के बनने के बाद यह समय घटकर लगभग 2.5 से 3 घंटे रह सकता है। हाईवे शहरों की भीड़भाड़ से बाहर निकलेगा, जिससे जाम की समस्या कम होगी। गंडक नदी पर बनने वाला नया पुल आवागमन को और सुगम बनाएगा।

उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा

बेहतर सड़क कनेक्टिविटी का सीधा असर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। हाईवे के किनारे वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, छोटे उद्योग और व्यापारिक केंद्र विकसित होने की संभावना है। यह मार्ग वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व और नेपाल सीमा की ओर जाने वाले पर्यटकों के लिए भी प्रमुख संपर्क मार्ग बनेगा, जिससे पर्यटन गतिविधियों को नई गति मिल सकती है।

किन जिलों को होगा फायदा?

इस परियोजना से कई जिलों के लोगों को लाभ मिलेगा। मुजफ्फरपुर (साहेबगंज क्षेत्र), पूर्वी चंपारण (अरेराज, केसरिया, चकिया), पश्चिम चंपारण (बेतिया, लौरिया और आसपास के क्षेत्र), लाखों लोगों के लिए यह सड़क रोजमर्रा की आवाजाही को आसान बनाएगी।

ग्रीनफील्ड हाईवे के फायदे

ग्रीनफील्ड हाईवे आमतौर पर सीधे और कम मोड़ वाले होते हैं, जिससे दूरी और यात्रा समय दोनों कम होते हैं। इनमें सर्विस लेन, अंडरपास और आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं शामिल की जाती हैं। रिहायशी इलाकों से बाहर निर्माण होने के कारण विस्थापन की समस्या भी कम होती है। भविष्य में इस मार्ग पर 100 से 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलने की संभावना है।

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