प्रस्ताव और बहस
यह प्रस्ताव डेमोक्रेट टिम केन और रिपब्लिकन रैंड पॉल द्वारा पेश किया गया था। इसके तहत यह प्रावधान था कि जब तक कांग्रेस किसी अभियान को अधिकृत नहीं करती, अमेरिकी सेनाओं को ईरान के खिलाफ शत्रुता से वापस बुलाना अनिवार्य होगा। लेकिन सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के 53-47 के बहुमत और राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का इजरायल सहित व्यापक समर्थन मिलने के कारण, यह विधेयक पारित नहीं हो सका।
हालात और पृष्ठभूमि
यह मतदान उस समय हुआ जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर था। संघर्ष के पहले पांच दिन में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और तेहरान के कई वरिष्ठ नेता मारे जा चुके थे। इसके अलावा, कुवैत में अमेरिकी अड्डे पर ईरानी हमले में अमेरिकी सैनिकों की जान भी गई। डेमोक्रेट्स का तर्क है कि ट्रंप ने हवाई हमले का आदेश देते समय कांग्रेस को दरकिनार किया और युद्ध के औचित्य को बदलते हुए पेश किया। लेकिन अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान से तत्काल खतरा मौजूद था और कार्रवाई अनिवार्य थी।
ट्रंप का बड़ा बयान
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ “बहुत मजबूत स्थिति” में हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता के संभावित उत्तराधिकारी को निशाना बनाया जा रहा है और तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल भंडार को तेजी से नष्ट किया जा रहा है। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा, “युद्ध के मोर्चे पर हम अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। सीधे शब्दों में कहें तो, यदि कोई मुझसे पूछे कि प्रदर्शन कैसा है, मैं कहूँगा 10 में से लगभग 15।”

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