भारत की ताकत होगी दोगुनी, रूस के साथ नई डिफेंस डील की आहट

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच भारत अपनी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को और सशक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश रूस से पांच अतिरिक्त S-400 एयर डिफेंस सिस्टम लेने की तैयारी कर रहा है। इस संबंध में प्रारंभिक स्तर पर रक्षा खरीद तंत्र में सहमति बन चुकी है और अब प्रस्ताव उच्चस्तरीय स्वीकृति की प्रक्रिया से गुजरेगा।

क्यों अहम है यह कदम?

भारत पहले ही S-400 प्रणाली को अपनी रणनीतिक रक्षा संरचना में शामिल कर चुका है। यह सिस्टम लंबी दूरी से दुश्मन के विमान, ड्रोन और मिसाइलों को पहचानने और उन्हें मार गिराने की क्षमता रखता है। मौजूदा समय में भारत के पास तीन सिस्टम सक्रिय हैं, जबकि दो और इकाइयों के जल्द शामिल होने की संभावना है। यदि पांच नए सिस्टम जुड़ते हैं तो देश के विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में बहुस्तरीय वायु सुरक्षा कवच तैयार किया जा सकेगा। इससे सीमावर्ती इलाकों और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों की सुरक्षा और मजबूत होगी।

हालिया घटनाओं के बाद कदम

पिछले वर्ष क्षेत्रीय तनाव के दौरान भारतीय वायु रक्षा प्रणाली की भूमिका अहम रही। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में आकाशीय सुरक्षा सबसे निर्णायक तत्व बन चुकी है। ड्रोन, क्रूज मिसाइल और लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों के दौर में मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम किसी भी देश की पहली सुरक्षा रेखा माने जाते हैं।

खरीद प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी?

रक्षा खरीद की प्रक्रिया कई चरणों से गुजरती है। आवश्यकता की स्वीकृति मिलने के बाद लागत निर्धारण पर बातचीत होती है। इसके पश्चात वित्तीय परीक्षण और अंततः सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से अंतिम मंजूरी ली जाती है। माना जा रहा है कि प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर सिस्टम सीधे रूस से खरीदे जाएंगे, जबकि रखरखाव और तकनीकी सहयोग में भारतीय कंपनियों की भूमिका बढ़ सकती है।

पैंटसिर सिस्टम पर भी विचार

इसके साथ ही कम दूरी की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पैंटसिर मिसाइल सिस्टम की खरीद पर भी विचार चल रहा है। यह प्रणाली विशेष रूप से ड्रोन, हेलीकॉप्टर, रॉकेट और कम दूरी की मिसाइलों से सुरक्षा देने के लिए जानी जाती है। रणनीति यह है कि लंबी दूरी की S-400 प्रणाली के साथ छोटी दूरी की सुरक्षा परत भी तैयार की जाए, ताकि बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा खड़ा हो सके।

यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है तो दक्षिण एशिया में सामरिक संतुलन पर इसका प्रभाव पड़ना तय है। भारत की बढ़ती वायु रक्षा क्षमता पड़ोसी देशों के लिए स्पष्ट संकेत होगी कि देश अपनी सुरक्षा के मामले में किसी तरह की ढील नहीं बरतना चाहता।

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