होली के दिन पटना- दिल्ली दौड़
पिछले कुछ दिनों में नेताओं की पटना से दिल्ली और दिल्ली से पटना की लगातार बैठकें यह संकेत दे रही हैं कि बिहार में सत्ता हस्तांतरण की तैयारी हो रही है। यदि नीतीश राज्यसभा जाते हैं, तो तीन महीने के भीतर राज्य में नई सरकार बन सकती है।
बीजेपी का सोशल इंजीनियरिंग
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। जाति आधारित राजनीतिक समीकरणों में पार्टी ने इस बार सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूले का इस्तेमाल किया है। कुल 89 विधायक जीतने के बाद बीजेपी के पास पर्याप्त ताकत है कि वह अपना नया सीएम चेहरा पेश करे।
निशांत कुमार की एंट्री
वहीं, नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता ने सबको चौंका दिया है। माना जा रहा है कि यदि नीतीश राज्यसभा जाते हैं, तो निशांत को डिप्टी सीएम बनाकर जेडीयू का कोर वोट बैंक एकजुट रखा जा सकता है।
पांच प्रमुख दावेदार
सम्राट चौधरी – वर्तमान डिप्टी सीएम और कोइरी समाज के बड़े नेता। आक्रामक रुख और ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ उन्हें सबसे प्रबल दावेदार बनाती है।
नित्यानंद राय – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और यादव समुदाय से। बीजेपी उनके जरिए जेडीयू के वोट बैंक पर सेंध लगाने की योजना बना सकती है।
विजय कुमार सिन्हा – भूमिहार समुदाय का प्रतिनिधि और वर्तमान डिप्टी सीएम। संगठनात्मक अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
राजीव प्रताप रूडी – राजपूत समाज के बड़े नेता। सारण के सांसद के रूप में उनका प्रभाव पार्टी को फायदा पहुंचा सकता है।
डार्क हॉर्स / नया चेहरा – बीजेपी आलाकमान कभी-कभी पुराने नेताओं के बजाय नए, कम चर्चित चेहरे को सामने लाता है। इसमें ईबीसी या दलित वर्ग के नेता शामिल हो सकते हैं, जैसे राजभूषण चौधरी, रेणु देवी या जनक राम आदि।
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