चुनाव चरण और संभावित समय-सारणी क्या?
जानकारी के अनुसार, बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव कम से कम छह चरणों में ही संभव हैं। 2021 में कोविड महामारी के दौरान आठ चरणों में मतदान हुआ था, जबकि 2016 में छह चरणों में चुनाव संपन्न हुए थे। इस बार भी चुनाव आयोग ने सुरक्षा और प्रशासनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए कम से कम छह चरणों में चुनाव करवा सकता हैं।
सुरक्षा और एसआईआर प्रक्रिया प्रमुख चुनौती
चुनाव की योजना बनाते समय दो प्रमुख कारक ध्यान में रखे जा रहे हैं। पहला, राज्य में बड़े पैमाने पर सुरक्षा तैनाती आवश्यक है और दूसरा, लंबित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और उसके न्यायिक निर्णय। पश्चिम बंगाल में 60 लाख से अधिक मतदाताओं का भविष्य अभी अधर में है। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 200 से अधिक कंपनियां पहले ही तैनात की जा चुकी हैं।
चुनाव आयोग की क्या है तैयारियां?
चुनाव आयोग में उच्च स्तरीय विचार-विमर्श जारी है ताकि सभी चरणों का चुनाव कार्यक्रम तय किया जा सके। प्रक्रिया में लगभग 40-45 दिनों की अवधि आवश्यक मानी जाती है, इसलिए मार्च के मध्य तक कैलेंडर जारी होने की संभावना है। आयोग की पूर्व परंपरा के अनुसार चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव कार्यक्रम एक साथ घोषित किए जा सकते हैं।
मतदान प्रक्रिया और समयसीमा
बंगाल में चुनाव प्रक्रिया मई की शुरुआत तक पूरी हो सकती है। नए विधानसभा के गठन की अंतिम समयसीमा 7 मई है। तमिलनाडु में विधानसभा गठन 10 मई तक, असम में 20 मई तक और पुडुचेरी में 15 जून तक होना अनिवार्य है। केरल में चुनाव आयोग की समीक्षा के बाद ही चुनाव की तारीखों का निर्धारण होगा।
राजनीतिक हलचल भी तेज
चुनाव आयोग के बंगाल दौरे से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में 6 मार्च को धरना देंगी। वहीं राजनीतिक दल अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं और चुनावी रणनीति तय कर रहे हैं।

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