8वें वेतन आयोग ने दिल्ली के चंद्रलोक बिल्डिंग में अपना कार्यालय खोल दिया है और काम की रफ्तार बढ़ा दी है। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों पर सरकार कितनी सहमति जताती है।
1. मेडिकल अलाउंस में बड़ा प्रस्ताव
कर्मचारी संगठनों ने सुझाव दिया है कि फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) को वर्तमान 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 20,000 रुपये किया जाए। इसका उद्देश्य उन कर्मचारियों और पेंशनर्स की मदद करना है, जो ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (CGHS) की सुविधा उपलब्ध नहीं है। महंगाई और इलाज की बढ़ती लागत को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा रहा है।
2. फिटमेंट फैक्टर और सालाना सैलरी इंक्रीमेंट
सैलरी सुधार को लेकर कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3.25 करने की पुरानी मांग को दोहराया है। साथ ही, सालाना सैलरी इंक्रीमेंट को वर्तमान 3% से बढ़ाकर 7% करने का प्रस्ताव रखा गया है। पोस्टल विभाग समेत कई संगठन चाहते हैं कि कम से कम 5% की बढ़ोतरी निश्चित हो ताकि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की जीवनशैली पर सकारात्मक असर पड़े।
3. बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव
कर्मचारी संगठनों ने परिवार की यूनिट के विस्तार का प्रस्ताव रखा है। यदि सरकार इसे मंजूरी देती है, तो बेसिक सैलरी कैलकुलेशन में 66% तक का प्रभाव देखने को मिल सकता है। इसका मतलब है कि जिन कर्मचारियों पर माता-पिता या अन्य परिवार सदस्य निर्भर हैं, उनकी सैलरी में पर्याप्त बढ़ोतरी होगी।
4. छुट्टियों और रिटायरमेंट लाभ में सुधार
एलटीसी (LTC) की सुविधा को कैश विकल्प के रूप में देने का प्रस्ताव है, ताकि कर्मचारी इसे अपनी जरूरत के अनुसार खर्च कर सकें। इसके साथ ही रिटायरमेंट पर छुट्टियों के बदले मिलने वाले पैसे की सीमा को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने की मांग की गई है। पेंशन और अन्य रिटायरमेंट लाभों में सुधार के लिए भी कदम उठाए जाने की संभावना है।
5. पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग
कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि नई योजनाएं, जैसे NPS और UPS, कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा नहीं देती हैं। हालांकि सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं आया है, लेकिन संगठन अपनी मांगों पर लगातार जोर दे रहे हैं।
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