रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के भीतर 1250 से अधिक ठिकानों पर कार्रवाई की है, जबकि इजरायल ने 250 से ज्यादा स्थानों को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। हालात लगातार अस्थिर होते जा रहे हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहरा असर पड़ा है।
खाड़ी देशों तक पहुंची आग
ईरान की जवाबी कार्रवाई का असर खाड़ी के कई देशों में देखा गया। कतर की राजधानी दोहा, कुवैत में अमेरिकी सैन्य अड्डे, सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठान, संयुक्त अरब अमीरात के हवाई अड्डे और बहरीन में अमेरिकी नौसैनिक सुविधाएं निशाने पर रहीं। जॉर्डन और साइप्रस में भी हमलों की सूचनाएं सामने आई हैं।
बढ़ती हताहतों की संख्या
ईरान की राजधानी तेहरान में बड़े धमाकों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमलों से हालात गंभीर बताए जा रहे हैं। कई रिहायशी इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व से जुड़े परिसरों पर हमले की खबरों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
अमेरिका की अतिरिक्त सैन्य तैयारी
अमेरिकी रक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि क्षेत्र में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए जा सकते हैं। वाशिंगटन की ओर से यह भी कहा गया है कि सभी विकल्प खुले हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि टकराव लंबा खिंच सकता है।
वैश्विक असर की बढ़ती आशंका
ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इस संघर्ष का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात नहीं संभले तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है। फिलहाल पश्चिम एशिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
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