बिहार सरकार का बड़ा फैसला, हर जिले में खुलेगा नारकोटिक्स थाना

पटना। बिहार सरकार ने नशे के बढ़ते नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आर्थिक अपराध इकाई और सीआईडी से अलग कर बनाए गए मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो को अब जिला स्तर तक मजबूत करने की तैयारी है। प्रस्ताव है कि राज्य के हर जिले में अलग नारकोटिक्स थाना स्थापित किया जाए, ताकि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों की जांच तेज और केंद्रित हो सके।

राज्य से जिले तक नई कमांड संरचना

नई व्यवस्था के तहत शराब और ड्रग्स से जुड़े मामलों की निगरानी एक ही कमान के अंतर्गत की जाएगी। राज्य स्तर पर विशेष थाना गठित करने की स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि औपचारिक अधिसूचना की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल तकनीकी कारणों से संबंधित मामले आर्थिक अपराध इकाई में दर्ज हो रहे हैं, लेकिन जल्द ही यह जिम्मेदारी नए ब्यूरो को पूरी तरह सौंप दी जाएगी।

एडीजी की निगरानी में मिशन मोड अभियान

यह पूरा अभियान एडीजी (मद्य निषेध) की सीधी निगरानी में संचालित होगा। राज्यभर में कार्यरत 218 एंटी लीकर टास्क फोर्स (ALTF) को भी इसी ब्यूरो के नियंत्रण में लाया जा रहा है। इससे शराबबंदी और ड्रग नियंत्रण की कार्रवाई एकीकृत रूप से संचालित होगी। सरकार ने इस ढांचे को मजबूत करने के लिए 88 नए पद सृजित किए हैं, जबकि 229 पुराने पदों का पुनर्विन्यास किया जा रहा है।

तकनीकी बाधाएं हटते ही तेज होगी कार्रवाई

राज्यस्तरीय थाने की अधिसूचना लंबित होने के कारण फिलहाल कुछ प्रशासनिक अड़चनें बनी हुई हैं। हालांकि जिला स्तर पर थानों के सक्रिय होते ही पुलिस को सीधे केस दर्ज करने और त्वरित कार्रवाई का अधिकार मिल जाएगा। जल्द ही जिला स्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की संरचना, अधिकार और कार्यप्रणाली को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।

सरकार की ये पहल क्यों अहम मुद्दा माना जा रहा?

नशा तस्करी सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी है। अलग नारकोटिक्स थानों की स्थापना से मामलों की विशेषज्ञता आधारित जांच संभव होगी। इससे अभियुक्तों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाने और शीघ्र सजा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इसे बिहार में नशे के खिलाफ अब तक की सबसे व्यापक और संगठित प्रशासनिक कार्रवाई माना जा सकता है।

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