बफर स्टॉक बढ़ाने की योजना
सरकार की योजना के अनुसार, प्याज का एक बड़ा बफर स्टॉक तैयार किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर बाजार में इसकी आपूर्ति की जा सके। यह खरीद अभियान मई की शुरुआत से शुरू होने की संभावना है। इस बार भंडारण और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
रिकवरी दर बढ़ाने पर जोर
पिछले वर्षों में प्याज की रिकवरी दर में सुधार देखने को मिला है। पहले जहां यह लगभग 65 से 70 प्रतिशत थी, वहीं अब इसे और बढ़ाकर करीब 75 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका मतलब यह है कि भंडारण के दौरान खराब होने वाले प्याज की मात्रा कम हो और अधिक से अधिक हिस्सा उपयोग योग्य रहे।
किसानों की स्थिति और मांग
इस समय कई राज्यों, खासकर महाराष्ट्र में, किसानों को प्याज की कीमतों से काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उत्पादन अधिक होने के बावजूद बाजार में दाम लागत से भी नीचे चले गए हैं। ऐसे में किसानों की मांग है कि सरकार कम से कम एक निश्चित समर्थन मूल्य पर प्याज की खरीद सुनिश्चित करे ताकि उन्हें उचित लाभ मिल सके।
उत्पादन में बढ़ोतरी से कीमतों में गिरावट
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष प्याज की खेती और उत्पादन दोनों में वृद्धि दर्ज की गई है। उत्पादन बढ़ने के कारण बाजार में आपूर्ति मजबूत हुई है, जिससे खुदरा कीमतों में गिरावट आई है। फिलहाल बाजार में प्याज की कीमतें पिछले साल की तुलना में कम स्तर पर बनी हुई हैं।
प्याज का महंगाई नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका
प्याज को खाद्य महंगाई का एक महत्वपूर्ण घटक माना जाता है। इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर आम जनता के बजट को प्रभावित करता है। यदि सरकार का यह बफर स्टॉक सिस्टम प्रभावी ढंग से काम करता है तो त्योहारों और कमी के समय कीमतों में अचानक बढ़ोतरी को रोका जा सकता है।

0 comments:
Post a Comment