रूस-भारत-चीन मिले, तो डॉलर का वर्चस्व होगा खत्म

नई दिल्ली। दुनिया की बदलती भू-राजनीति के बीच BRICS और SCO जैसे मंच एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। साल 2026 में भारत में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन खास माना जा रहा है, क्योंकि इसमें रूस, भारत और चीन के शीर्ष नेताओं के एक साथ आने की संभावना है। यह त्रिकोण वैश्विक शक्ति संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है।

RIC का महत्व और बहुध्रुवीय दुनिया

रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में बदलाव के बीच RIC का एक साथ आना सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है। यह एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर इशारा करता है, जहां शक्ति केवल एक देश या समूह तक सीमित नहीं रहती।

डॉलर वर्चस्व पर असर की चर्चा

BRICS के भीतर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वैकल्पिक भुगतान प्रणाली और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने की पहलें तेज हो रही हैं। इससे वैश्विक स्तर पर डॉलर के वर्चस्व को चुनौती मिलने की चर्चा भी बढ़ी है। हालांकि यह प्रक्रिया लंबी और जटिल है, लेकिन इसके संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं।

अमेरिका के लिए नई चुनौती

RIC और BRICS की सक्रियता से अमेरिका के सामने नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका की नीतियों पर इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत पूरी तरह किसी एक खेमे में जाने के बजाय संतुलन बनाए हुए है।

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