कोविड काल का असर अब भी बना वजह
वित्त मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में बताया है कि महामारी के दौरान देश की आर्थिक स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ा था। उस समय सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं और राहत योजनाओं पर बड़े पैमाने पर खर्च करना पड़ा, जिससे वित्तीय संतुलन बनाए रखना चुनौती बन गया। इसी वजह से जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 से लागू होने वाली DA/DR की तीन किस्तों को रोकने का फैसला लिया गया था।
बार-बार उठी मांग, लेकिन नहीं मिली मंजूरी
पिछले कई वर्षों से कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स द्वारा इन बकाया किस्तों के भुगतान की मांग लगातार की जाती रही है। विभिन्न मंचों पर इस मुद्दे को उठाया गया, यहां तक कि कानूनी आधार पर भी एरियर जारी करने की अपील की गई। बावजूद इसके, सरकार ने हर बार वित्तीय परिस्थितियों का हवाला देते हुए इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट के संदर्भ में भी नहीं बदला रुख
हाल ही में एक कर्मचारी संगठन की ओर से सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए एरियर देने की मांग की गई थी। लेकिन वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया कि महामारी का आर्थिक प्रभाव केवल एक वर्ष तक सीमित नहीं था, बल्कि उसके बाद भी राजकोषीय दबाव बना रहा। ऐसे में एरियर का भुगतान व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है।

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