प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में मत्स्य उद्योग को एक महत्वपूर्ण सेक्टर के रूप में बताया है। सरकार का मानना है कि यह क्षेत्र न केवल रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम है, बल्कि ग्रामीण और तटीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करता है। इसी दिशा में मछली पालन और सी-फूड निर्यात को तकनीक और आधुनिक प्रबंधन से जोड़ा जा रहा है।
टैरिफ के बावजूद मजबूत प्रदर्शन
हाल के वर्षों में अमेरिकी बाजार में टैरिफ बढ़ने से भारतीय सी-फूड, खासकर झींगा (श्रिम्प) निर्यात पर असर पड़ा। इसके बावजूद भारत के समुद्री निर्यात ने उल्लेखनीय मजबूती दिखाई है। वित्त वर्ष 2024-25 के मुकाबले 2025-26 में निर्यात मूल्य और मात्रा दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस सेक्टर की स्थिरता को दर्शाता है।
झींगा बना निर्यात की रीढ़
भारतीय समुद्री निर्यात में फ्रोजन झींगा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है। यह कुल निर्यात आय का बड़ा हिस्सा देता है। इसके अलावा स्क्विड, कटलफिश और अन्य समुद्री उत्पादों की मांग में भी तेजी देखी गई है।
नए बाजारों की ओर भारत
अमेरिकी बाजार में गिरावट के बाद भारत ने चीन, यूरोपीय संघ और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों जैसे वियतनाम, थाईलैंड और मलेशिया में अपने निर्यात को मजबूत किया है। इन क्षेत्रों में निर्यात वृद्धि ने अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।
सरकार की रणनीति और सुधार
भारत सरकार ने इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जैसे निर्यात मानकों को मजबूत करना, ट्रेसबिलिटी सिस्टम लागू करना और गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर देना। इसके साथ ही 200 से अधिक नए निर्यात प्रतिष्ठानों को विभिन्न देशों में मंजूरी दी गई है, जिससे भारत की वैश्विक पहुंच बढ़ी है।

0 comments:
Post a Comment