बैंकों के लोन सिस्टम में बड़ा बदलाव
नए नियमों के तहत बैंकों को अब लोन की गुणवत्ता और जोखिम का आकलन एक नए तरीके से करना होगा। इसका सीधा असर यह होगा कि बैंक अपने खराब होने वाले लोन की पहचान पहले ही कर सकेंगे और उसके लिए जरूरी फंड अलग रख सकेंगे।
'Expected Credit Loss' मॉडल लागू
अब तक बैंक 'Incurred Loss' मॉडल पर काम करते थे, जिसमें नुकसान होने के बाद प्रावधान किया जाता था। लेकिन नए नियमों के अनुसार अब 'Expected Credit Loss (ECL)' मॉडल लागू होगा। इस मॉडल में बैंक को पहले से यह अनुमान लगाना होगा कि कौन सा लोन भविष्य में डिफॉल्ट हो सकता है और उसी के अनुसार प्रावधान करना होगा। यह पूरी तरह भविष्य-आधारित प्रणाली है।
लोन को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा
नए नियमों के तहत सभी लोन को जोखिम के आधार पर तीन स्टेज में वर्गीकृत किया जाएगा:
स्टेज 1: कम जोखिम वाले लोन, जिनमें डिफॉल्ट की संभावना बहुत कम होती है।
स्टेज 2: ऐसे लोन जिनमें जोखिम बढ़ता हुआ दिख रहा है।
स्टेज 3: पूरी तरह खराब या डिफॉल्ट हो चुके लोन।
इस वर्गीकरण से बैंकों को अपने जोखिम को बेहतर तरीके से समझने और नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
NPA नियम में कोई बदलाव नहीं
RBI ने स्पष्ट किया है कि नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) की परिभाषा पहले जैसी ही रहेगी। यानी यदि किसी लोन की किस्त 90 दिनों तक नहीं चुकाई जाती है, तो उसे NPA ही माना जाएगा।
कब से लागू होंगे नए नियम?
RBI ने बैंकों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया है। ये 14 नए नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इससे पहले बैंकों से सुझाव लिए गए थे और ड्राफ्ट पर चर्चा की गई थी।
बैंकिंग सिस्टम पर क्या असर पड़ेगा?
इन नियमों से बैंकिंग सिस्टम अधिक मजबूत और सुरक्षित बनेगा। बैंकों को जोखिम का पहले से अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी, जिससे भविष्य में वित्तीय संकट की संभावना कम हो जाएगी।

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