सरकार ने इस बीच एक अहम निर्णय लेते हुए हड़ताल की अवधि को उपार्जित अवकाश में समायोजित करने की घोषणा की है। फिलहाल 9 मार्च से 16 अप्रैल तक की अवधि को इसमें शामिल किया गया है। यदि बातचीत सफल होती है, तो इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
हड़ताल से प्रभावित रहा कामकाज
राजस्व सेवा के अंचल और भूमि से जुड़े अधिकारी 9 मार्च से सामूहिक अवकाश पर हैं, जिसके चलते कई अंचलों में कामकाज प्रभावित हुआ है। आम लोगों को जमीन और राजस्व से जुड़े कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों से बातचीत जारी
अब तक विभागीय स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि अब मामले में हस्तक्षेप करते हुए प्रत्यय अमृत के स्तर पर पहल की जा सकती है, जिससे समाधान का रास्ता निकले।
क्या है मुख्य मांग
राजस्व सेवा संघ की प्रमुख मांग यह है कि उनके संवर्ग के अधिकारियों को ही डीसीएलआर (भूमि सुधार उप समाहर्ता) और अन्य जिला स्तरीय पदों पर नियुक्त किया जाए। इससे उनके कैडर को उचित प्रतिनिधित्व मिलने की बात कही जा रही है।
सरकार का प्रस्ताव
सरकार की ओर से पहले बातचीत में यह प्रस्ताव दिया गया था कि डीसीएलआर के 50 प्रतिशत पदों पर राजस्व सेवा के अधिकारियों को तैनात किया जाएगा। हालांकि इस पर अभी सहमति नहीं बन सकी है।

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