केंद्र सरकार ने दिया तोहफा: किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी का ऐलान

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने किसानों के हित में एक अहम कदम उठाते हुए खेती के तरीके और सोच दोनों में बदलाव की दिशा तय की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि 'कृषि-वानिकी' का नाम बदलकर जल्द ही 'वृक्ष-आधारित खेती' किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि किसानों के बीच फैली गलतफहमियों को दूर करना और उन्हें आय के नए स्रोतों से जोड़ना है।

नाम बदलने के पीछे बड़ी सोच

अब तक कृषि-वानिकी शब्द में वन जुड़ा होने के कारण कई किसानों को यह डर रहता था कि पेड़ों को उगाने के बाद वे उनका व्यावसायिक उपयोग नहीं कर पाएंगे या कानूनी बाधाएं आ सकती हैं। इसी भ्रम को खत्म करने के लिए सरकार इसे आसान और स्पष्ट नाम 'वृक्ष-आधारित खेती' देने जा रही है। इससे किसानों को यह समझने में आसानी होगी कि वे अपनी जमीन पर पेड़ लगाकर भी आय कमा सकते हैं।

आय बढ़ाने के लिए नई रणनीति

सरकार का मानना है कि सिर्फ पारंपरिक खेती से किसानों की आमदनी में बड़ा इजाफा संभव नहीं है। इसी वजह से अब एकीकृत खेती मॉडल पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें फसल उत्पादन के साथ-साथ डेयरी, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती को भी शामिल किया जाएगा। यह मॉडल खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

उर्वरकों के उपयोग पर चिंता

कृषि मंत्री ने रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई जगह किसान जरूरत से ज्यादा उर्वरकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। इस स्थिति को सुधारने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

क्षेत्रीय स्तर पर बनेगी नई योजना

खेती को और बेहतर बनाने के लिए अब राष्ट्रीय स्तर की एक बैठक के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग रणनीति तैयार की जाएगी। वर्ष 2026 से देश के विभिन्न हिस्सों उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और उत्तर-पूर्व में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित होंगे। इससे हर क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु और फसल के अनुसार सटीक योजना बनाई जा सकेगी।

उत्तर भारत की भूमिका अहम

उत्तर भारत को देश की कृषि ताकत का मजबूत आधार बताया गया। पंजाब और हरियाणा ने जहां हरित क्रांति में बड़ा योगदान दिया, वहीं उत्तर प्रदेश खाद्यान्न उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसके अलावा पहाड़ी राज्यों में फल, सब्जी और फूलों का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, जो कृषि विविधीकरण का संकेत है।

बीज और तकनीक पर जोर

कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम के लिए उन्नत बीजों और नई तकनीकों को जरूरी बताया गया है। बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए अब वैज्ञानिक तरीके से खेती करना समय की मांग बन गया है। इसके साथ ही राज्यों से कहा गया है कि वे अपनी परिस्थितियों के अनुसार दीर्घकालिक कृषि योजना तैयार करें।

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