आय में तेज उछाल
राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के अनुसार, गन्ना किसानों की औसत आय पहले करीब 50-55 हजार रुपये सालाना थी, जो अब बढ़कर लगभग 1.2 लाख रुपये तक पहुंच गई है। यह बढ़ोतरी खेती से मिलने वाले रिटर्न, बेहतर दाम और समय पर भुगतान के संयोजन का परिणाम मानी जा रही है।
पैसे भुगतान में तेजी
सरकार का कहना है कि गन्ना किसानों को अब तक रिकॉर्ड स्तर पर भुगतान किया गया है और सबसे बड़ा बदलाव भुगतान की गति में आया है। पहले जहां किसानों को महीनों कभी-कभी सालों तक इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब अधिकतर मामलों में 8-10 दिनों के भीतर पैसा खातों में पहुंच रहा है।
दाम और बुनियादी सुविधाएं
गन्ने के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी के साथ-साथ बिजली, सिंचाई और खेतों तक पानी पहुंचाने की योजनाओं पर भी जोर दिया गया है। कई क्षेत्रों में बिजली बिल में राहत और सिंचाई ढांचे के विस्तार से लागत कम करने में मदद मिली है। नतीजतन, किसानों का मार्जिन बेहतर हुआ है।
उत्पादन में बढ़त, फसल विविधता पर जोर
राज्य में गेहूं, धान, आलू, तिलहन और सब्जियों के उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। फसल विविधता बढ़ने से जोखिम कम हुआ है और किसानों को अलग-अलग मौसम में आय के अवसर मिल रहे हैं। इससे कुल कृषि आय में स्थिरता आई है।
इथेनॉल नीति का असर, किसानों को खुशखबरी
गन्ने से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने से चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है। जब मिलों के पास नकदी की कमी नहीं रहती, तो किसानों का भुगतान भी समय पर हो पाता है। यह बदलाव गन्ना अर्थव्यवस्था की पूरी श्रृंखला किसान से लेकर मिल तक को अधिक स्थिर बनाता है।

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