किसानों को क्या मिलेगा?
योजना के तहत करीब 4 लाख मिनीकिट किसानों में वितरित किए जाएंगे, जिन पर 50% सब्सिडी दी जा रही है। हर मिनीकिट को इस तरह तैयार किया गया है कि किसान एक साथ कई फसलों का लाभ उठा सकें। इसमें ढैंचा के साथ मक्का, उड़द, ग्वार, भिंडी, लोबिया और ज्वार के बीज शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार करीब 45,000 क्विंटल ढैंचा बीज अलग से भी बांट रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान हरी खाद का उपयोग कर सकें।
क्यों खास है 'हरी खाद'?
ढैंचा जैसी फसल को उगाकर बाद में खेत में ही जोत दिया जाता है, जिससे यह प्राकृतिक खाद का काम करती है। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, पानी सोखने की क्षमता सुधरती है और रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम हो जाती है। अनुमान है कि इससे यूरिया और डीएपी जैसे खादों पर किसानों का खर्च 20-30% तक घट सकता है।
किसानों को कैसे होगा फायदा?
इस योजना से किसानों को दोहरा लाभ मिलेगा। एक तरफ उन्हें सस्ते दाम पर बीज मिलेंगे, वहीं दूसरी तरफ फसल विविधीकरण का मौका भी मिलेगा। भिंडी, लोबिया और ज्वार जैसी फसलें अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती हैं, जिससे किसान सिर्फ धान-गेहूं के पारंपरिक चक्र तक सीमित नहीं रहेंगे।
किसान कैसे उठाएं इसका लाभ?
किसानों को अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या बीज गोदाम से संपर्क करना होगा। साथ ही 'पारदर्शी किसान सेवा पोर्टल' पर पंजीकरण अपडेट रखना जरूरी है, ताकि योजना का लाभ आसानी से मिल सके।

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