योजना का विस्तार, और ज्यादा लोगों को लाभ
राज्य सरकार ने अब प्रदेश की सभी अनुसूचित जनजातियों को इस योजना के अंतर्गत शामिल करने का निर्णय लिया है। इससे पहले इस योजना का दायरा सीमित था, लेकिन अब इसे व्यापक बनाकर ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंदों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इस फैसले से प्रदेश की 35 से अधिक जातियों को सीधा लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
योजना का विकास कैसे हुआ
मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण की शुरुआत वर्ष 2018 में की गई थी। शुरुआती चरण में इसमें केवल कुछ ही समुदाय शामिल थे। बाद में समय के साथ इसका विस्तार किया गया और कई पिछड़े तथा वंचित वर्गों को जोड़ा गया। धीरे-धीरे मुसहर, वनटांगिया सहित कई अन्य समुदायों को इस योजना में शामिल किया गया, जिससे बड़ी संख्या में परिवारों को पक्का घर मिला।
किन-किन जातियों को लाभ
नए विस्तार के तहत कई और जनजातियों और समुदायों को योजना में शामिल किया गया है। इनमें भोटिया, जौनसारी, राजी, गोंड, धुरिया, ओझा, नायक, पठारी, राजगोंड, खरवार, खैरवार, परहिया, पंखा, पनिका, अगरिया, पटारी, भुइयां, भुनिया जैसी जातियां शामिल हैं। इससे यह सुनिश्चित किया गया है कि कोई भी वंचित वर्ग आवास सुविधा से बाहर न रहे।
आपदा प्रभावित और कमजोर वर्ग भी शामिल
इस योजना का लाभ सिर्फ जातिगत आधार पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी दिया जा रहा है। इनमें शामिल हैं प्राकृतिक आपदा से बेघर हुए परिवार, कुष्ठ रोग और गंभीर बीमारियों से प्रभावित लोग, निराश्रित महिलाएं, दिव्यांगजन, महामारी और गंभीर संक्रमण से प्रभावित परिवार। इससे यह योजना और अधिक समावेशी बन गई है।

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