जमानत पर रिहा होने के बाद भी मिल सकेगी ड्यूटी
नई व्यवस्था के तहत अब वे होमगार्ड स्वयं सेवक, जो किसी मामले में आरोपी हैं लेकिन जमानत पर रिहा हैं, ड्यूटी कर सकेंगे। पहले ऐसे मामलों में अक्सर उन्हें सेवा से बाहर कर दिया जाता था या ड्यूटी नहीं दी जाती थी। अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि संबंधित व्यक्ति हिरासत में नहीं है, तो उसे ड्यूटी पर लगाया जा सकता है।
आरोप पत्र दाखिल होने पर भी नहीं रुकेगी सेवा
सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए यह भी तय किया है कि जिन होमगार्ड्स के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, वे भी ट्रायल के दौरान ड्यूटी कर सकेंगे। इससे उन हजारों स्वयं सेवकों को राहत मिलेगी, जो केवल आरोपों के कारण काम से दूर हो जाते थे।
पुरानी वर्गीकरण व्यवस्था खत्म
पहले नियमों में सजा की अवधि के आधार पर मामलों को बांटा जाता था। जैसे 7 साल तक और उससे अधिक सजा वाले अपराध। कई मामलों में इस आधार पर स्वतः सेवा समाप्ति हो जाती थी। अब इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार केवल आरोप के आधार पर किसी होमगार्ड को सेवा से नहीं हटाया जाएगा।
बहाली का निर्णय केस की स्थिति पर निर्भर
सरकार ने साफ किया है कि बहाली का फैसला जमानत की स्थिति, केस की प्रकृति और ट्रायल की प्रगति को देखते हुए लिया जाएगा। यानी हर मामले का मूल्यांकन अलग-अलग तरीके से होगा, जिससे निष्पक्षता बनी रहे।
अंतिम फैसला कोर्ट के निर्णय पर
हालांकि यह राहत अस्थायी है। अगर किसी मामले में दोष सिद्ध हो जाता है, तो संबंधित होमगार्ड को सेवा से हटा दिया जाएगा। यानी अंतिम निर्णय न्यायालय के फैसले पर ही निर्भर रहेगा।
बहाली से पहले होगा सत्यापन और मेडिकल टेस्ट
ड्यूटी पर लौटने से पहले संबंधित होमगार्ड स्वयं सेवकों का सत्यापन और मेडिकल परीक्षण किया जाएगा, ठीक उसी तरह जैसे भर्ती के समय किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल योग्य और फिट व्यक्ति ही सेवा में लौटें।

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