फार्मर रजिस्ट्री की बाध्यता में ढील
पहले सरकार ने यह अनिवार्य किया था कि सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए किसानों की फार्मर रजिस्ट्री होना जरूरी है। लेकिन अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस बाध्यता को अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया गया है। इसका मतलब है कि बिना रजिस्ट्री वाले किसान भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अपना गेहूं बेच सकेंगे। इस निर्णय के बाद क्रय केंद्रों पर किसानों की भीड़ बढ़ने और खरीद प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसानों को सीधा फायदा
इस फैसले से उन किसानों को सबसे अधिक राहत मिलेगी जो किसी कारणवश अब तक अपनी फार्मर रजिस्ट्री पूरी नहीं कर सके थे। अब वे भी सरकारी केंद्रों पर अपनी उपज बेचकर MSP का लाभ उठा सकेंगे। किसानों का कहना है कि इससे उन्हें बाजार में कम कीमत पर बेचने की मजबूरी से छुटकारा मिलेगा और उनकी आय में स्थिरता आएगी।
पंजीकरण प्रक्रिया और समय सीमा
सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश में करोड़ों किसानों की फार्मर रजिस्ट्री की जानी है। इसके लिए 15 मई तक की अंतिम तिथि तय की गई है। इसके बाद भी रजिस्ट्री न कराने वाले किसानों को भविष्य में सरकारी योजनाओं और अनुदानों से वंचित रहना पड़ सकता है। हालांकि वर्तमान में गेहूं खरीद के लिए यह शर्त शिथिल कर दी गई है, जिससे किसानों को तत्काल राहत मिली है।

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