जिलावार रिक्तियों के आधार पर चयन
इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि शिक्षक पदों की नियुक्ति अब जिलावार रिक्तियों के आधार पर की जाएगी। यानी हर जिले की जरूरत के अनुसार पद तय होंगे और उसी के अनुसार मेरिट सूची तैयार की जाएगी। अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट और आरक्षण नियमों के आधार पर जिला आवंटित किया जाएगा।
38 जिलों का विकल्प अनिवार्य
नए नियम के अनुसार, आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अब पूरे बिहार के सभी 38 जिलों का विकल्प देना होगा। पहले सीमित विकल्प भरने की सुविधा होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आयोग ने साफ कर दिया है कि जो अभ्यर्थी जिला विकल्प नहीं भरेंगे, उनका चयन किसी भी जिले के लिए नहीं माना जाएगा। इसलिए आवेदन भरते समय विशेष सावधानी रखना बेहद जरूरी है।
अल्फाबेट सिस्टम खत्म करने की तैयारी
इस बार एक और बड़ा बदलाव यह प्रस्तावित है कि पहले लागू अल्फाबेट आधारित जिला आवंटन प्रणाली को समाप्त किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य में ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़ी समस्याओं को कम करना है। अब चयन पूरी तरह मेरिट और विकल्प के आधार पर होगा।
जिला आवंटन की प्रक्रिया
मेरिट सूची के अनुसार जिन जिलों में जितनी रिक्तियां होंगी, उसी अनुपात में अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। यदि कोई उम्मीदवार सीमित जिलों का चयन करता है और उसकी मेरिट के अनुसार उसे किसी अन्य जिले में सीट मिलती है, जिसे उसने विकल्प में नहीं भरा है, तो ऐसी स्थिति में उसका चयन प्रभावित हो सकता है।
46,882 पदों पर होगी भर्ती
परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह के अनुसार, इस चौथे चरण में कुल 46,882 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। इनमें शिक्षा विभाग के अलावा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग और अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण विभाग के पद भी शामिल हैं।

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