भारत की जरूरत और रूस का दांव
भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है। जहां जरूरत करीब 42 स्क्वाड्रन की है, वहीं मौजूदा संख्या लगभग 30 के आसपास है। ऐसे में रूस इस कमी को अपने लिए एक रणनीतिक अवसर के रूप में देख रहा है और भारत को एक पूरी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता देने की बात कर रहा है।
नासिक में उत्पादन की योजना
रूसी प्रस्ताव के अनुसार, Su-57 का निर्माण भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक संयंत्र में किया जा सकता है। यह वही जगह है जहां पहले Su-30MKI जैसे रूसी विमान पहले से ही बनाए जा चुके हैं। शुरुआती आकलन में यह पाया गया है कि मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा हिस्सा इस नए प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो सकता है, हालांकि कुछ नई सुविधाओं में निवेश की जरूरत होगी।
नासिक बन सकता है एयरोस्पेस हब
अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है तो नासिक भारत का एक प्रमुख स्टेल्थ फाइटर निर्माण केंद्र बन सकता है। यहां न सिर्फ असेंबली लाइन विकसित करनी होगी, बल्कि कंपोजिट मटेरियल, एडवांस एवियोनिक्स और स्टेल्थ कोटिंग जैसी उच्च तकनीकी सुविधाओं का भी विस्तार करना पड़ेगा।
टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सबसे अहम पहलू
इस डील का सबसे बड़ा आकर्षण टेक्नोलॉजी ट्रांसफर है। रूस भारत को कई महत्वपूर्ण तकनीकों तक पहुंच देने को तैयार बताया जा रहा है, जिसमें सोर्स कोड, सिस्टम इंटीग्रेशन और भविष्य में भारतीय तकनीक जोड़ने की संभावना शामिल है। यह भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए बेहद अहम कदम साबित हो सकता है।

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