8वें वेतन आयोग की तैयारी: नए फॉर्मूले से केंद्रीय कर्मचारियों को मोटी सैलरी

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं। नेशनल काउंसिल (ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) के स्टाफ साइड ने आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की मांग रखी है। इसमें सबसे अहम प्रस्ताव न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 69,000 रुपये करने और परिवार के आकलन मॉडल को बदलने का है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मौजूदा वेतन संरचना आज की महंगाई और जीवन-यापन की लागत के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसमें व्यापक सुधार जरूरी है।

न्यूनतम वेतन में बड़ा इजाफा करने की मांग

कर्मचारी पक्ष ने सुझाव दिया है कि केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन कम से कम 69,000 रुपये तय किया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा वेतन से बढ़ती महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।

5 यूनिट फैमिली फॉर्मूले का प्रस्ताव

इस बार सबसे बड़ा बदलाव 'परिवार संरचना' को लेकर सुझाया गया है। अब तक वेतन निर्धारण में 3 यूनिट परिवार को आधार माना जाता था, लेकिन नए प्रस्ताव में इसे 5 यूनिट तक बढ़ाने की मांग की गई है।

प्रस्तावित ढांचे के अनुसार:

कर्मचारी = 1 यूनिट

जीवनसाथी = 1 यूनिट

दो बच्चे = 0.8-0.8 यूनिट

माता-पिता (आश्रित) = 0.8 यूनिट

इस तरह कुल मिलाकर लगभग 5 यूनिट का मानक तैयार होता है।

क्यों जरूरी माना जा रहा है यह बदलाव

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आज के समय में अधिकांश सरकारी कर्मचारी केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि अपने माता-पिता की भी जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में पुराने 3 यूनिट मॉडल से वास्तविक खर्चों का सही आकलन नहीं हो पाता। इसलिए वेतन संरचना को वास्तविक जीवन-यापन की जरूरतों के अनुसार अपडेट करना जरूरी बताया जा रहा है।

परामर्श प्रक्रिया में तेजी

वेतन आयोग ने भी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से सुझाव लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल और सरकारी प्लेटफॉर्म के जरिए 30 अप्रैल 2026 तक सुझाव भेजे जा सकते हैं। यह प्रक्रिया विभिन्न हितधारकों की राय लेकर एक नया और संतुलित वेतन ढांचा तैयार करने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

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