कानून में संशोधन की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) एक्ट में संशोधन की तैयारी कर रही है। इस बदलाव को संसद के आगामी सत्र में पेश किए जाने की संभावना है। अभी पेंशन सेक्टर में विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत तय है।
बीमा क्षेत्र जैसा मॉडल
सरकार पहले ही बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत FDI की अनुमति दे चुकी है। अब इसी मॉडल को पेंशन सेक्टर में लागू करने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विदेशी निवेश को बढ़ावा देना और वित्तीय सेक्टर को मजबूत करना है।
NPS सिस्टम में भी बदलाव संभव
संशोधन प्रस्ताव में नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ट्रस्ट की संरचना में बदलाव की बात भी शामिल हो सकती है। मौजूदा समय में यह ट्रस्ट PFRDA के नियमों के तहत काम करता है, लेकिन भविष्य में इसे अधिक स्वतंत्र ढांचे में बदला जा सकता है। इसके लिए एक नया प्रबंधन बोर्ड बनाने की संभावना भी जताई जा रही है, जिसमें सरकार की प्रमुख भागीदारी बनी रहेगी।
भारत में पेंशन सिस्टम का ढांचा
भारत में वर्ष 2004 से नई सरकारी भर्तियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था की जगह NPS लागू किया गया था। बाद में 2009 में इसे सभी नागरिकों के लिए निवेश विकल्प के रूप में खोल दिया गया।
100% FDI से क्या असर होगा?
अगर पेंशन सेक्टर में पूरी तरह विदेशी निवेश की अनुमति मिलती है तो इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे निवेशकों को नए विकल्प और बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, तकनीक, प्रबंधन और पारदर्शिता के स्तर पर भी सुधार देखने को मिल सकता है।

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