जमीन तय, लेकिन औपचारिकताएं बाकी
केंद्रीय विद्यालय संगठन, पटना की रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर जिलों में विद्यालयों के लिए जमीन की पहचान हो चुकी है। लेकिन कई जगहों पर अनापत्ति प्रमाण पत्र और विभागीय मंजूरी न मिलने के कारण काम रुका हुआ है। भागलपुर में स्वास्थ्य विभाग की अनुमति लंबित है, जबकि कैमूर, झंझारपुर और मुंगेर में कृषि विभाग से स्वीकृति का इंतजार है। कुछ अन्य स्थानों पर भी विभिन्न विभागों से मंजूरी प्रक्रिया अधूरी है।
कई जिलों में तेजी से आगे बढ़ रहा काम
बिहार के गया (बोधगया), कटिहार और दरभंगा जैसे जिलों में जमीन तय हो चुकी है और प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जबकि मधेपुरा में भूमि हस्तांतरण का काम जारी है। वहीं शेखपुरा, सीतामढ़ी और नालंदा में वैकल्पिक जमीन की पहचान भी पूरी हो चुकी है।
कुछ जगहों पर अतिक्रमण बनी चुनौती
भोजपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में जमीन तो उपलब्ध है, लेकिन वहां अतिक्रमण और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण काम में बाधा आ रही है। प्रशासन को पहले इन समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।
इन जिलों को सख्त निर्देश जारी
मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिया है कि लंबित अनापत्ति प्रमाण पत्र जल्द जारी किए जाएं। साथ ही जिलाधिकारियों को अतिक्रमण हटाने, पहुंच मार्ग बनाने और जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया को तेज करने को कहा गया है। सरकार की योजना है कि नए विद्यालयों में पढ़ाई जल्द शुरू की जाए। इसके लिए कई जिलों में सरकारी स्कूल, कॉलेज और अन्य भवनों को अस्थायी रूप से तैयार किया जा रहा है।
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