भारत को 42.5 टन सोने का भंडार मिला, देश के लिए बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। भारत में सोने के प्रति आकर्षण कोई नई बात नहीं है। सदियों से यह धातु न सिर्फ निवेश बल्कि परंपरा और संस्कृति का हिस्सा रही है। हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करने वाला भारत अब आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाता नजर आ रहा है। आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में शुरू हो रही देश की पहली बड़ी निजी सोने की खान इसी बदलाव का संकेत है।

निजी क्षेत्र की ऐतिहासिक पहल

Geomysore Services India Pvt Ltd की जोन्नागिरी गोल्ड परियोजना को भारत की पहली बड़े स्तर की निजी सोना खनन पहल माना जा रहा है। इसका प्रोसेसिंग प्लांट जल्द ही पूरी तरह चालू होने वाला है। फिलहाल यहां प्रारंभिक संचालन जारी है, जबकि औपचारिक शुरुआत राज्य सरकार के स्तर पर किए जाने की तैयारी है।

42.5 टन सोने की संभावना

कर्नूल जिले के जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पागिदिरायी क्षेत्रों में फैले इस प्रोजेक्ट में करीब 13 टन से अधिक सोने के प्रमाणित भंडार की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कुल भंडार 42.5 टन तक होने का अनुमान जताया गया है। यह खोज भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक संभावना लेकर आई है।

सालाना उत्पादन से बढ़ेगी ताकत

जब यह परियोजना अपनी पूरी क्षमता पर पहुंचेगी, तब यहां से हर साल लगभग 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोना निकाले जाने की उम्मीद है। यह उत्पादन अगले कई वर्षों तक जारी रह सकता है, जिससे देश के घरेलू सोना उत्पादन में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।

आधुनिक तकनीक से खनन शुरू

आपको बता दें की जोन्नागिरी में अत्याधुनिक मशीनों और नियंत्रित तकनीकों के जरिए खनन किया जा रहा है। कम समय में तैयार किया गया यह प्लांट भारत में आधुनिक और जिम्मेदार खनन का उदाहरण बन सकता है। फिलहाल भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में इस तरह की परियोजनाएं आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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