20 लाख टन आलू की सरकारी खरीद
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के निर्णय के तहत उत्तर प्रदेश में 20 लाख टन आलू की खरीद को हरी झंडी दी गई है। यह खरीद ‘बाजार हस्तक्षेप योजना’ के तहत की जाएगी, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है।
तय हुआ न्यूनतम हस्तक्षेप मूल्य
इस योजना के अंतर्गत आलू की खरीद 6,500.90 रुपये प्रति टन के बाजार हस्तक्षेप मूल्य पर की जाएगी। इससे किसानों को खुले बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव और कीमत गिरने की स्थिति से राहत मिलेगी। इस बड़े पैमाने की खरीद के लिए सरकार पर लगभग 203.15 करोड़ रुपये का वित्तीय भार आने का अनुमान है।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
अक्सर देखा जाता है कि आलू जैसी जल्दी खराब होने वाली फसल का सही दाम न मिलने पर किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इस फैसले से अब किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उन्हें सीधा लाभ मिलेगा।
बिचौलियों पर लगेगी रोक
इस सरकारी खरीद से बाजार में बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सकेगा। साथ ही फसल की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना भी बढ़ेगी। यह फैसला न केवल आलू उत्पादक किसानों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि इसे कृषि क्षेत्र में एक बड़ा सुधार भी माना जा रहा है। इससे किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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