बिहार में 'ड्राइवरों' के लिए खुशखबरी, सरकार ने दी सौगात

पटना। बिहार सरकार ने सड़क हादसों पर लगाम लगाने और ड्राइवरों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि अब सड़क सुरक्षा को लेकर राज्य में एक व्यापक और तकनीक आधारित रणनीति लागू की जाएगी।

दुर्घटनाओं का होगा गहराई से विश्लेषण

राज्य में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को अब माइनर और मेजर श्रेणियों में बांटकर उनका विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह समझना है कि हादसों के पीछे असली कारण क्या हैं और उन्हें कैसे रोका जा सकता है। इस विश्लेषण के आधार पर एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

ड्राइवरों का बनेगा पूरा डेटाबेस

सरकार ड्राइवरों के लिए एक जिलावार ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करने जा रही है। इसमें पंजीकृत और प्रशिक्षित चालकों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे न केवल ड्राइवरों की पहचान आसान होगी, बल्कि उनकी ट्रेनिंग और निगरानी भी बेहतर तरीके से हो सकेगी।

ट्रेनिंग नहीं लेने पर होगी कार्रवाई

भारी वाहन (HMV) चालकों के लिए प्रशिक्षण को अनिवार्य रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। यदि कोई चालक बार-बार सूचना देने के बावजूद ट्रेनिंग के लिए नहीं आता, तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। वहीं, ट्रेनिंग लेने वाले चालकों को प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी, जिससे वे इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लें।

हर जिले में ड्राइविंग टेस्ट की सुविधा

ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए हर जिले में स्थायी टेस्टिंग व्यवस्था लागू की जा रही है। इससे लोग अपनी सुविधा के अनुसार साल भर कभी भी ड्राइविंग टेस्ट दे सकेंगे, जिससे लंबी प्रतीक्षा की समस्या खत्म होगी।

दुर्घटना पीड़ितों को मिलेगा मुफ्त इलाज

सरकार ने एक बड़ा मानवीय कदम उठाते हुए सड़क हादसों में घायल लोगों के लिए ट्रामा सेंटर में डेढ़ लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य 'गोल्डन आवर' में समय पर इलाज सुनिश्चित करना है, जिससे जान बचाई जा सके।

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