भारत के फैसले से चीन खुश? सामने आई बड़ी वजह

नई दिल्ली। भारत सरकार ने विदेशी निवेश (FDI) नियमों में अहम बदलाव करते हुए एक संतुलित और व्यावहारिक कदम उठाया है। इस फैसले के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इससे चीन से जुड़े निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना आसान हो जाएगा। नए नियम 1 मई से लागू हो चुके हैं और इन्हें निवेश माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है नया बदलाव?

सरकार ने Foreign Exchange Management Act के तहत नियमों में संशोधन किया है। अब यदि किसी विदेशी कंपनी में चीन या हांगकांग की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत तक है, तो वह कंपनी भारत में ऑटोमैटिक रूट के तहत निवेश कर सकती है। यानी पहले जहां ऐसे मामलों में सरकारी मंजूरी जरूरी होती थी, अब वह बाध्यता खत्म हो गई है, बशर्ते कंपनी सीधे तौर पर चीन या किसी सीमावर्ती देश में पंजीकृत न हो।

सीधे चीनी निवेश पर अभी भी सख्ती

यह समझना जरूरी है कि यह छूट सीधे चीन या भारत से सटे देशों में रजिस्टर्ड कंपनियों को नहीं दी गई है। ऐसी कंपनियों को अब भी पहले की तरह सरकारी अनुमति लेनी होगी। यानी सरकार ने पूरी तरह दरवाजे नहीं खोले हैं, बल्कि सीमित और नियंत्रित ढील दी है।

कोरोना काल की सख्ती में आंशिक राहत

साल 2020 में कोविड-19 के दौरान भारत ने पड़ोसी देशों से आने वाले निवेश पर कड़े नियम लागू किए थे। उस समय आशंका थी कि आर्थिक कमजोरी का फायदा उठाकर विदेशी कंपनियां भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ा सकती हैं। इसलिए हर निवेश के लिए सरकारी मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी।

इन निवेशों पर भी RBI की निगरानी बनी रहेगी

इन निवेशों पर पूरी तरह छूट नहीं है। कंपनियों को Reserve Bank of India के तय नियमों के अनुसार रिपोर्टिंग और अन्य प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। इससे पारदर्शिता और निगरानी बनी रहेगी।

भारत सरकार का बीमा सेक्टर के लिए भी बड़ा फैसला

सरकार ने बीमा क्षेत्र में भी बड़ा कदम उठाया है। अब बीमा कंपनियों और इंटरमीडियरी में 100% तक विदेशी निवेश ऑटोमैटिक रूट से संभव होगा। हालांकि Life Insurance Corporation of India में विदेशी निवेश की सीमा 20% ही रखी गई है।

0 comments:

Post a Comment