'मेक इन अमेरिका' नीति के तहत बड़ा कदम
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम घरेलू उद्योग को मजबूत करने और विदेशी कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका में पहले से ही ऑटो सेक्टर में भारी निवेश हो रहा है और यह नई नीति उस गति को और बढ़ाएगी। उनका यह भी कहना है कि यदि यूरोपीय कंपनियां अमेरिका में ही उत्पादन करती हैं, तो उन्हें इस टैरिफ से राहत दी जा सकती है।
यूरोप की तीखी प्रतिक्रिया और चेतावनी
यूरोपीय यूनियन ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। EU के व्यापार प्रतिनिधियों ने इसे द्विपक्षीय विश्वास पर चोट बताया है और कहा है कि अमेरिका एक भरोसेमंद साझेदार की तरह व्यवहार नहीं कर रहा। यूरोपीय आयोग ने स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिका पहले हुए समझौते की अनदेखी करता है, तो EU भी अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी विकल्पों पर विचार करेगा। इस बयान ने संकेत दिया है कि जवाबी टैरिफ या अन्य प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं।
पहले हुए समझौते पर संकट
दोनों पक्षों के बीच पहले हुए व्यापार समझौते में ऑटोमोबाइल सेक्टर पर 15 प्रतिशत टैरिफ तय किया गया था। इस नए फैसले ने उस समझौते की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि लगातार बदलती व्यापार नीतियां वैश्विक निवेशकों में अनिश्चितता पैदा कर रही हैं, जिसका असर सप्लाई चेन और उत्पादन लागत पर पड़ सकता है।
0 comments:
Post a Comment