तीसरी ताकत के रूप में उभरी विजय की पार्टी
सर्वे के अनुसार, डीएमके गठबंधन अभी भी बढ़त में नजर आ रहा है और उसे लगभग 125 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के लिए पर्याप्त है। वहीं एआईएडीएमके गठबंधन करीब 45 सीटों तक सिमटता दिख रहा है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा विजय की पार्टी को लेकर है, जो पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर ही लगभग 63 सीटों के आसपास पहुंचती दिख रही है।
यह संकेत देता है कि राज्य की जनता अब पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प की तलाश में है। विजय की लोकप्रियता और उनकी नई राजनीतिक छवि ने खासकर युवाओं और शहरी वोटरों को प्रभावित किया है।
वोट शेयर में भी मजबूत पकड़
अगर वोट प्रतिशत की बात करें, तो डीएमके को लगभग 39 प्रतिशत समर्थन मिलने का अनुमान है। वहीं विजय की पार्टी को करीब 30 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है, जो किसी नई पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। एआईएडीएमके को लगभग 27 प्रतिशत वोट मिलने की संभावना जताई गई है।
बदलते समीकरणों का संकेत
इस सर्वे से यह साफ है कि भले ही डीएमके बढ़त बनाए हुए है, लेकिन विजय की पार्टी ने राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। पहले जहां मुकाबला सीधा दो दलों के बीच होता था, अब तीसरी ताकत के आने से वोट बंटवारा और सत्ता की रणनीति दोनों प्रभावित हो रही हैं।
क्या ‘हीरो’ बन पाएंगे विजय?
राजनीति में विजय की एंट्री को लेकर शुरू में संशय था, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने कम समय में ही मजबूत पकड़ बना ली है। हालांकि सत्ता तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी लंबा सफर तय करना होगा, लेकिन इतना जरूर है कि उन्होंने तमिलनाडु की राजनीति में अपनी मौजूदगी मजबूती से दर्ज करा दी है।

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