8वें वेतन आयोग: शिक्षकों की सैलरी ₹1.34 लाख करने की मांग

नई दिल्ली। देश में शिक्षकों के वेतन ढांचे को लेकर बहस तेज हो गई है। हाल ही में राजधानी में हुई बैठकों में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अपनी मांगों को मजबूती से उठाया। उनका कहना है कि मौजूदा सैलरी स्ट्रक्चर बदलती आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है, इसलिए इसमें व्यापक सुधार जरूरी है।

शुरुआती वेतन को लेकर नया फॉर्मूला

शिक्षक संगठनों ने एंट्री-लेवल (लेवल-6) के वेतन को नए सिरे से तय करने की मांग रखी है। उनका सुझाव है कि फिटमेंट फैक्टर को मौजूदा स्तर से बढ़ाकर 2.6 से 3.8 के बीच किया जाए। अगर ऐसा होता है, तो शुरुआती वेतन करीब ₹1.30 लाख से ₹1.34 लाख तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा हर साल 6-7% वेतन वृद्धि का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिससे कर्मचारियों की आय महंगाई के साथ संतुलित रह सके। एक अहम मुद्दा यह भी रहा कि महंगाई भत्ता 50% होने पर उसे मूल वेतन में शामिल कर लिया जाए।

भत्तों में बड़े बदलाव की मांग

बैठकों में केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि भत्तों के ढांचे को भी अपडेट करने पर जोर दिया गया।

शहरों के आधार पर HRA को 12%, 24% और 36% तक बढ़ाने का सुझाव। 

ट्रांसपोर्ट अलाउंस को बेसिक का 12–15% करने और न्यूनतम सीमा तय करने की मांग। 

बच्चों की शिक्षा भत्ता (CEA) को बढ़ाकर ₹7,000 प्रति माह प्रति बच्चा करने का प्रस्ताव। 

इन प्रस्तावों का मकसद शिक्षकों की वास्तविक खर्च क्षमता को बेहतर बनाना है।

सेवा के बाद भी सुरक्षा पर फोकस

शिक्षक संगठनों ने रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली सुविधाओं को भी मजबूत करने की जरूरत बताई।

रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष करने की मांग। 

ग्रेच्युटी की सीमा को काफी बढ़ाने का सुझाव। 

पुरानी पेंशन योजना (OPS) को दोबारा लागू करने पर जोर। 

उनका मानना है कि इससे शिक्षकों को भविष्य को लेकर ज्यादा भरोसा मिलेगा।

क्या कहती है तस्वीर?

फिलहाल 8वें वेतन आयोग को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन शिक्षकों की ओर से उठ रही आवाजें इस दिशा में दबाव जरूर बना रही हैं। अगर इन मांगों पर विचार होता है, तो आने वाले समय में शिक्षा क्षेत्र में बड़ा आर्थिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

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