चीन का डगमगाता साम्राज्य, भारत का उदय तेज: अमेरिका भी देख रहा नया खेल

नई दिल्ली। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन आज अपने ही रियल एस्टेट संकट से जूझ रही है। जिस प्रॉपर्टी मार्केट को कभी विकास और निवेश का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता था, वही अब गहरे संकट में फंस चुका है। घरों की कीमतें गिरकर 2005 के स्तर पर पहुंच गई हैं, यानी चीन में लगभग 20 साल पहले की स्थिति में लौट गई हैं।

चीन में कैसे बना था प्रॉपर्टी का बुलबुला

2000 के बाद चीन में शहरीकरण और आसान बैंक लोन ने रियल एस्टेट को निवेश का सबसे आकर्षक विकल्प बना दिया था। लोग इसे शेयर बाजार से भी सुरक्षित मानने लगे थे। सरकार ने भी विकास और निर्माण को बढ़ावा दिया, जिससे हर शहर में बड़ी-बड़ी रिहायशी परियोजनाएं शुरू हुईं। लेकिन यह पूरा ढांचा अब संकट में आ गया है।

सरकारी सख्ती ने बढ़ाई गिरावट

2020 में चीन सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों पर कर्ज को नियंत्रित करने के लिए 'थ्री रेड लाइन्स' नीति लागू की। इसका असर यह हुआ कि डेवलपर्स के पास नकदी की भारी कमी हो गई। कई प्रोजेक्ट अधूरे रह गए, खरीदारों ने भुगतान रोक दिया और बाजार में भरोसा टूट गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अब चीन का रियल एस्टेट सेक्टर लंबे समय तक सुस्ती में रह सकता है। विशेषज्ञ इसे जापान की 1990 के दशक की लंबी मंदी से तुलना कर रहे हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

चीन का यह संकट केवल उसकी सीमा तक सीमित नहीं है। वैश्विक निवेशक और अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। अमेरिका समेत कई देश इसे चीन की आर्थिक कमजोरी के संकेत के रूप में देख रहे हैं। यह बदलाव अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

भारत के लिए क्या सीख?

भारत का रियल एस्टेट बाजार फिलहाल स्थिर और बढ़ती कीमतों वाला है, लेकिन विशेषज्ञ इसे चेतावनी के रूप में देख रहे हैं। कई शहरों में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों के लिए घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी सीख यह है कि बाजार को केवल निवेश और सट्टेबाजी से नहीं, बल्कि वास्तविक आवासीय जरूरतों से संचालित होना चाहिए। अगर मांग कृत्रिम रूप से बढ़ाई गई तो भविष्य में असंतुलन पैदा हो सकता है।

0 comments:

Post a Comment