अवकाश पर जाने का मुद्दा
यूपी में कई शिक्षामित्रों ने बिना किसी उचित कारण के अवकाश लिया था और इस समय का इस्तेमाल अन्य व्यक्तिगत या बाहरी कामों के लिए किया। जब यह जानकारी मिली, तो यह साबित हुआ कि इन शिक्षामित्रों की गैरमौजूदगी के कारण बच्चों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, खासकर लखनऊ, सीतापुर, रायबरेली, लखीमपुर खीरी, हरदोई और उन्नाव जैसे जिलों में।
योजना के तहत, इन शिक्षामित्रों को बिना वेतन के अवकाश की अनुमति देने का कोई आधिकारिक नियम नहीं था, फिर भी इनकी अनुपस्थिति को कैसे मंजूरी दी गई, यह एक बड़ा सवाल बन गया। इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, शिक्षा महानिदेशक ने तुरंत कार्रवाई करते हुए यह आदेश दिया कि इन शिक्षामित्रों की संविदा समाप्त कर दी जाए। यह आदेश संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भेज दिया गया है।
खंड शिक्षा अधिकारियों की भूमिका
इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है। सवाल यह उठता है कि इन शिक्षामित्रों के अवकाश को कैसे मंजूरी दी गई, जबकि अवैतनिक अवकाश के लिए कोई नियम मौजूद नहीं था। इस बात की जांच चल रही है कि कहीं इन अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं थी, जो इस गड़बड़ी को बढ़ावा दे रहे थे।
अगर जांच में किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी की संलिप्तता साबित होती है, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे यह संदेश जाता है कि शासन इस मामले में कोई समझौता नहीं करेगा और किसी भी दोषी अधिकारी को बचने नहीं दिया जाएगा। योगी सरकार ने इस कदम से यह साबित किया है कि वह शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन और पारदर्शिता को लेकर गंभीर है।
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