कर्मचारियों की आवाज तेज, 8वें वेतन आयोग पर NC-JCM ने पेश की 15 सूत्री मांगों की सूची

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग को लेकर सरकारी कर्मचारियों की ओर से बड़ी मांगें सामने आई हैं। NC-JCM (स्टाफ साइड) की स्थायी समिति ने 28 अप्रैल को नई दिल्ली में हुई बैठक में वेतन, पेंशन, भत्तों और सेवा शर्तों से जुड़ी 15 प्रमुख मांगों का विस्तृत प्रस्ताव पेश किया। इन मांगों में पुरानी पेंशन की बहाली से लेकर फिटमेंट फैक्टर और अवकाश नकदीकरण तक कई अहम मुद्दे शामिल हैं।

वेतन और प्रमोशन सिस्टम में बड़े बदलाव की मांग

NC-JCM ने कर्मचारियों के करियर ग्रोथ और वेतन संरचना में सुधार की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार 30 वर्षों की सेवा में कम से कम 5 प्रमोशन सुनिश्चित किए जाने चाहिए। इसके अलावा प्रमोशन के समय दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने और वेतन निर्धारण को और अधिक लाभकारी बनाने की बात भी रखी गई है।

पेंशन और सेवा लाभों पर सबसे बड़ा फोकस

सबसे अहम मांगों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली शामिल है। इसके साथ ही NPS और UPS प्रणाली की समीक्षा की मांग भी की गई है। पेंशन संशोधन, पारिवारिक पेंशन में सुधार, ग्रेच्युटी में बढ़ोतरी और 5 साल में नियमित पेंशन संशोधन की व्यवस्था की भी मांग उठाई गई है। साथ ही OROP (वन रैंक वन पेंशन) जैसी व्यवस्था को भी व्यापक बनाने का सुझाव दिया गया है।

अवकाश और सुविधा नियमों में सुधार

NC-JCM ने 600 दिनों तक अर्जित अवकाश के नकदीकरण की मांग की है। इसके साथ ही बाल देखभाल अवकाश, पितृत्व अवकाश, मासिक धर्म अवकाश, मेडिकल अवकाश और दिव्यांग देखभाल अवकाश जैसे विशेष प्रावधानों को भी मजबूत करने की बात कही गई है।

बीमा और मुआवजे में बड़ा सुधार

कर्मचारियों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस (CGEGIS) की कवरेज बढ़ाने और अंशदान दरों में बदलाव की मांग रखी गई है। इसके अलावा सेवा के दौरान दुर्घटना में मृत्यु होने पर ₹2 करोड़ तक अनुग्रह राशि देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

बोनस और अन्य वित्तीय सुधार

बोनस संरचना में बदलाव करते हुए इसे केवल सीमा तक सीमित न रखकर मूल वेतन और DA के आधार पर तय करने की मांग की गई है। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति की 5% सीमा हटाकर सभी पात्र मामलों में नियुक्ति देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

भत्तों में बढ़ोतरी की मांग

महंगाई भत्ते (DA) के साथ जुड़े HRA, CEA और जोखिम भत्तों में तीन गुना तक बढ़ोतरी की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा भत्ते बढ़ती महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं हैं, इसलिए इन्हें वास्तविक जरूरतों के अनुसार संशोधित किया जाए।

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