केंद्र सरकार ने दी राहत: देशभर के किसानों को बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। खरीफ सीजन 2026 की शुरुआत से पहले देश के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस बार खाद की उपलब्धता को लेकर कोई संकट नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल के बावजूद किसानों को पुरानी दरों पर ही खाद उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे खेती की लागत पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।

हाल ही में आयोजित प्रेस वार्ता में उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने बताया कि सरकार ने इस सीजन के लिए खाद की मांग का पहले ही आकलन कर लिया है और उसी अनुसार भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। अनुमान है कि खरीफ 2026 के लिए करीब 390 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद की जरूरत होगी।

मजबूत स्टॉक से बढ़ा भरोसा

सरकार की तैयारियों का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अभी से देश में लगभग आधा स्टॉक उपलब्ध है। आमतौर पर इस समय तक जितनी खाद उपलब्ध रहती है, उससे कहीं ज्यादा इस बार पहले से ही भंडारण कर लिया गया है। इससे यह उम्मीद बढ़ी है कि बुवाई के दौरान किसानों को किसी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यूरिया, डीएपी और एनपीके जैसे प्रमुख उर्वरकों का स्टॉक पिछले साल की तुलना में अधिक है।

कीमतें स्थिर, सब्सिडी का सहारा

वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार ने किसानों को इससे बचाने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूरिया की कीमतें काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी हैं, फिर भी भारत में किसानों को यह बेहद कम कीमत पर उपलब्ध रहेगा। सरकार सब्सिडी के जरिए इस अंतर को खुद वहन कर रही है ताकि किसानों को महंगाई का सीधा असर न झेलना पड़े। यही वजह है कि यूरिया, डीएपी और अन्य उर्वरकों के दाम स्थिर रखे गए हैं।

उत्पादन और आयात दोनों पर जोर

खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा दिया है। देश में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर विदेशों से आयात भी किया गया है। इस दोहरी रणनीति के कारण सप्लाई चेन मजबूत बनी हुई है और बाजार में संतुलन कायम है।

किसानों के लिए क्या है इसके मायने

खरीफ सीजन देश की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है। ऐसे में समय पर खाद की उपलब्धता और कीमतों का नियंत्रण किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होता है। इससे न केवल खेती की लागत नियंत्रित रहती है, बल्कि उत्पादन बढ़ने की संभावना भी मजबूत होती है।

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