परियोजना की मुख्य बातें
करीब 101.51 किलोमीटर लंबा यह राष्ट्रीय राजमार्ग लगभग 6,969 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। इसे हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (HAM) के तहत विकसित करने की योजना है। परियोजना में निर्माण कार्य के साथ-साथ भूमि अधिग्रहण पर भी भारी खर्च अनुमानित है।
पर्यावरण के बीच संतुलन
एनएचएआई ने वन विभाग को भरोसा दिलाया है कि जितने पेड़ काटे जाएंगे, उनके बदले दस गुना पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही वन भूमि के बदले मुआवजा भी दिया जाएगा। इसके बावजूद मंजूरी की प्रक्रिया लंबी खिंच रही है, जिससे परियोजना की टाइमलाइन पर असर पड़ सकता है।
क्या होगा सड़क का फायदा?
यह हाईवे सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि विकास की नई धुरी साबित हो सकता है:
तेज यात्रा: लखनऊ से बहराइच की दूरी करीब डेढ़ घंटे में पूरी हो सकेगी।
ट्रेड कॉरिडोर: नेपाल सीमा के पास स्थित रूपईडीहा के जरिए भारत-नेपाल व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन को बढ़ावा: दुधवा नेशनल पार्क, कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य, अयोध्या धाम, देवीपाटन और श्रावस्ती जैसे प्रमुख धार्मिक व प्राकृतिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी।
कब शुरू होगा काम?
योजना के अनुसार अक्टूबर 2026 से निर्माण कार्य शुरू होना था, लेकिन वन विभाग की एनओसी में देरी के कारण शुरुआत टल सकती है। सरकार का लक्ष्य अक्टूबर 2027 तक इस हाईवे को पूरा करने का है, मगर वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसमें देरी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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