बिहार सरकार का बड़ा फैसला: स्थानीय ठेकेदारों को खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने विकास कार्यों में स्थानीय भागीदारी बढ़ाने और रोजगार सृजन को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य कैबिनेट की बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद अब सरकारी परियोजनाओं में स्थानीय संवेदकों (ठेकेदारों) को प्राथमिकता दी जाएगी। इस कदम को राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अहम माना जा रहा है।

स्थानीय ठेकेदारों को मिलेगा बड़ा अवसर

नए निर्णय के तहत अब 25 लाख रुपये से अधिक और 50 करोड़ रुपये तक की लागत वाली सिविल परियोजनाओं में राज्य के स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसका सीधा फायदा छोटे और मध्यम स्तर के संवेदकों को मिलेगा, जिन्हें अब बड़े प्रोजेक्ट्स में भाग लेने का मौका मिलेगा।

रोजगार सृजन पर सरकार का फोकस

सरकार ने सात निश्चय-3 योजना के तहत अगले पांच वर्षों में करीब एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा है। स्थानीय ठेकेदारों को बढ़ावा देने से न केवल निर्माण कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि युवाओं के लिए भी रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।

बाहरी कंपनियों पर निर्भरता होगी कम

इस फैसले के बाद राज्य में बाहरी कंपनियों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां मजबूत होंगी।

ग्रामीण सेतु योजना में बड़ा बदलाव

कैबिनेट ने ग्रामीण विकास से जुड़ी एक और अहम योजना में बदलाव किया है। अब तक जहां पुल निर्माण के लिए कई योजनाओं को मिलाकर टेंडर निकाले जाते थे, वहीं अब हर योजना के लिए अलग-अलग निविदा जारी की जाएगी।

छोटे ठेकेदारों को मिलेगा फायदा

नई टेंडर प्रणाली से छोटे ठेकेदारों के लिए भी अवसर बढ़ेंगे। पहले जहां बड़े समूह ही काम हासिल कर पाते थे, वहीं अब व्यक्तिगत स्तर पर भी भागीदारी संभव होगी।

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