बिहार सरकार का सख्त एक्शन, इन कर्मचारियों की जाएगी नौकरी

पटना। बिहार सरकार ने लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के तहत चल रही नल-जल योजना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस योजना की धीमी प्रगति और उदासीनता को लेकर सरकार ने कड़ा संदेश दिया है।

समीक्षा बैठक में खुली लापरवाही की पोल

मुंगेर, लखीसराय और जमुई प्रमंडलों की हालिया समीक्षा बैठक के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं। विभागीय निर्देशों के बावजूद कुछ अभियंता और अधिकारी क्षेत्रीय निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचे, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो गए। बैठक में यह भी पाया गया कि कुछ सहायक अभियंता मुख्यालय में ही बने रहे और फील्ड विजिट नहीं किया, जो उनकी जिम्मेदारी का स्पष्ट उल्लंघन माना गया।

लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई

इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभागीय सचिव ने साफ निर्देश दिए हैं कि जो भी अभियंता अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह या निष्क्रिय पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यहां तक कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति (CRS) तक की प्रक्रिया अपनाने की बात कही गई है। यह कदम सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसमें सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

लंबित योजनाओं को जल्द पूरा करने का आदेश

समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि नल-जल योजना से जुड़ी सभी लंबित परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। खासकर मुंगेर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को कार्य में तेजी लाने और समयसीमा के भीतर काम पूरा करने को कहा गया है।

शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी नजर

केंद्रीकृत शिकायत निवारण केंद्र (CGRC) में लंबित मामलों के त्वरित समाधान पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि आम जनता की शिकायतों का निपटारा समय पर और प्रभावी ढंग से हो। सभी अधीक्षण अभियंताओं और कार्यपालक अभियंताओं को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करने का निर्देश दिया गया है।

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